धनतेरस पूजा बाद वृक्षों के समीप दीप प्रज्वलित कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति के प्रति मानवीय उत्तरदायित्व की भावना को समर्पित स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान ने 6 नवंबर को अपना 40वां स्थापना दिवस शुभ धनतेरस के पावन अवसर पर मनाया। इस अवसर पर बोकारो स्थित पर्यावरण-मित्र वाटिका में वृक्ष दीपावली मनाया गया तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य, प्रकृति संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता का संदेश दिया गया। शुभारंभ आयुर्वेद एवं आरोग्य के अधिष्ठाता भगवान धन्वंतरि की षोडशोपचार विधि से वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अर्चना के साथ किया गया। संस्थान के पर्यावरण प्रहरियों ने भगवान धन्वंतरि से बोकारो, झारखंड सहित पूरे देश के रहिवासियों, नागरिकवृंद एवं समस्त जीव-जगत के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति और कल्याण की मंगलकामना की। संस्थान के उपाध्यक्ष पंडित अखिलेश ओझा ने विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई, जबकि अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार पांडेय ने यजमान के रूप में पूजन किया।
इस अवसर पर संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ ने संस्थान की स्थापना एवं उसके मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान की स्थापना वर्ष 1987 में शुभ धनतेरस के दिन संस्थापक एवं प्रख्यात पर्यावरणविद् ब्रह्मलीन पंडित गौरी शंकर ओझा द्वारा की गई थी। कहा कि विगत लगभग चार दशकों से संस्थान स्वास्थ्य जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण तथा प्रकृति के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि धनतेरस केवल धन-संपत्ति की प्राप्ति का पर्व नहीं, बल्कि आरोग्य, निरोगी जीवन और समृद्धि की कामना का भी प्रतीक है। भगवान धन्वंतरि की आराधना हमें यह संदेश देती है कि स्वस्थ जीवन मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति है। स्वच्छ एवं संतुलित पर्यावरण के बिना स्वस्थ समाज की कल्पना अधूरी है। स्वच्छ वायु, शुद्ध जल, हरित वृक्ष और जैव विविधता मानव जीवन के अस्तित्व एवं स्वास्थ्य के मूल आधार हैं।
वृक्षों के समीप दीप प्रज्वलित कर मनाई गई वृक्ष दीपावली
जानकारी के अनुसार पूजा-अर्चना के पश्चात संस्थान के पर्यावरण प्रहरियों एवं उपस्थित सदस्यों ने पर्यावरण-मित्र वाटिका के वृक्षों के समीप सुरक्षित स्थानों पर दीप प्रज्वलित कर वृक्ष दीपावली मनाई। इस अनूठी पहल के माध्यम से प्रकृति के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और संरक्षण का संकल्प व्यक्त किया गया। संस्थान का मानना है कि दीपावली का वास्तविक प्रकाश केवल घरों एवं प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका उजाला प्रकृति, पर्यावरण और समस्त जीव-जगत के कल्याण तक पहुंचना चाहिए। जिस प्रकार दीपक की रोशनी अंधकार को दूर करता है, उसी प्रकार वृक्षारोपण, वृक्षों का संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता प्रदूषण, जलवायु असंतुलन एवं पारिस्थितिक संकट जैसी चुनौतियों से मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उक्त कार्यक्रम के माध्यम से समाज में यह संदेश दिया गया कि वृक्ष केवल लकड़ी, फल अथवा छाया देने वाले प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि जीवनदायिनी ऑक्सीजन, स्वच्छ वायु, जल संरक्षण, मृदा संरक्षण एवं जैव विविधता के संवाहक हैं। इसलिए वृक्ष लगाना जितना आवश्यक है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उनका संरक्षण एवं संवर्धन करना है। संस्थान ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे स्वास्थ्य और पर्यावरण को एक-दूसरे का पूरक समझते हुए प्रकृति संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। प्रत्येक इंसान कम से कम एक वृक्ष लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प ले। साथ ही जल एवं ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए प्रदूषण मुक्त वातावरण के निर्माण में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करे।

कार्यक्रम का मूल संदेश रहा कि स्वस्थ इंसान से स्वस्थ समाज और स्वस्थ पर्यावरण से स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है। इस अवसर पर संस्थान ने अपने संस्थापक ब्रह्मलीन पंडित गौरी शंकर ओझा के पर्यावरण संरक्षण संबंधी विचारों एवं आदर्शों को स्मरण करते हुए उनके सपनों को साकार करने तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, स्वस्थ एवं हरित पृथ्वी के निर्माण का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम में संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’, अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार पांडेय, उपाध्यक्ष अखिलेश ओझा, कार्यकारी अध्यक्ष रघुवर प्रसाद, लक्ष्मण शर्मा, विजय कुमार त्रिपाठी, वीरेंद्र कुमार चौबे, वीणा देवी, धर्मेंद्र कुमार, अक्षय कुमार दुबे, बबलू पांडेय, शिवजी ओझा, ललन दुबे, अनुराग मिश्र, मृणाल कांत चौबे सहित अनेक पर्यावरण प्रहरी एवं गणमान्य उपस्थित थे।
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