Advertisement

परीक्षा रद्द कर विवाद खत्म नहीं किया, असल सवाल गड़बड़ी के जिम्मेदार कौन-एहतेशाम

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा 18 अगस्त को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले पर ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) के रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होना आंदोलनरत छात्रों के संघर्ष की एक महत्वपूर्ण जीत है, लेकिन सरकार इसे आंदोलन खत्म करने का बहाना न बनाए। छात्रों की लड़ाई केवल परीक्षा रद्द कराने की नहीं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराने की है।

एआईएसएफ जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने कहा कि अगर परीक्षा में कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी तो परीक्षा रद्द क्यों की गई? कहा कि अगर गड़बड़ी हुई थी तो जिम्मेदार के खिलाफ अब तक निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं की गयी? हेमंत सोरेन सरकार को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि हजारों अभ्यर्थियों ने वर्षों तक तैयारी की, परीक्षा शुल्क दिया और अपने भविष्य को इस भर्ती से जोड़ा। बार-बार परीक्षा विवादों के कारण छात्रों का समय, पैसा और भरोसा तीनों बर्बाद हो रहे हैं। कहा कि कैंसिल एग्जाम नहीं, बल्कि राज्य के युवाओं को फिक्स अकाउंटेंबिलिटी चाहिए। एआईएसएफ मांग करती है कि जेएसएससी-सीजीएल समेत विवादित नियुक्ति परीक्षाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। आंदोलन कर रहे छात्रों की सीबीआई जांच की मांग पर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

एहतेशाम ने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक हुई नियुक्ति परीक्षाओं की जांच की बात कही जा रही है, लेकिन जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जांच की समय-सीमा तय हो, रिपोर्ट सार्वजनिक हो और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि छात्रों को सिर्फ परीक्षा रद्द करने की घोषणा देकर चुप नहीं कराया जा सकता। जब तक दोषियों की जवाबदेही तय नहीं होगी और भर्ती प्रक्रिया पर छात्रों का भरोसा बहाल नहीं होगा एआईएसएफ का संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आंदोलनरत छात्रों से संवाद करने और उनकी मांगों पर लिखित एवं समयबद्ध निर्णय लेने की मांग की है।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *