प्रहरी संवाददाता/रांची (झारखंड)। बिहार और झारखंड कैडर के वरिष्ठ एवं ईमानदार अधिकारियों में शुमार सेवानिवृत्त आरक्षी उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) भवेश ठाकुर का निधन हो गया। उन्होंने 81 वर्ष की आयु में बिहार की राजधानी पटना स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से बिहार और झारखंड के पुलिस महकमे सहित प्रशासनिक हलकों में शोक की लहर है।
डीआईजी भवेश ठाकुर की गिनती बिहार व् झारखंड पुलिस महकमे के उन गिने-चुने अधिकारियों में होती थी, जिन्होंने अपनी सेवा के दौरान ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से कभी समझौता नहीं किया। झारखंड गठन से पूर्व एकीकृत बिहार में ठाकुर ने राज्य के कई संवेदनशील और प्रमुख जिलों में बतौर एसपी अपनी सेवाएं दी थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों पर नकेल कसने में उनकी कार्यशैली की मिसाल दी जाती है।
ज्ञात हो कि, वर्ष 2000 में झारखंड राज्य गठन के बाद ठाकुर ने नए राज्य की पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वे डीआईजी रांची और डीआईजी संथाल परगना जैसे बेहद महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इसके अलावा उन्होंने आईजी ट्रेनिंग के पद पर रहते हुए नए पुलिस जवानों और अधिकारियों को तराशने का कार्य किया। दिवंगत भवेश ठाकुर का परिवार भी प्रशासनिक सेवा के जरिए देश की सेवा में लगा है, उनके पुत्र रूपेश कुमार ठाकुर 2006 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा आईएएस के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वर्तमान में वे केंद्रीय श्रम विभाग (लेबर मिनिस्ट्री) में उच्च पद पर तैनात रहकर अपनी सेवारत हैं।
एक ईमानदार और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी दिवंगत ठाकुर के निधन की सूचना पाकर पटना स्थित उनके आवास पर शुभचिंतकों, रिश्तेदारों, पुलिस विभाग के वर्तमान व पूर्व अधिकारियों का तांता लगा है। सभी नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे है। बिहार और झारखंड पुलिस एसोसिएशन के सदस्यों सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। पुलिस महकमा में तैनात अधिकारियों के अनुसार दिवंगत ठाकुर का जाना पुलिस परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी बेदाग छवि आने वाली पीढ़ियों के पुलिस अधिकारियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
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