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बिना कोचिंग सबलपुर के लाल कमलनयन ने पास की बीपीएससी परीक्षा

माता-पिता के त्याग और सेल्फ स्टडी से मिली बड़ी कामयाबी

कमलनयन के सम्मान में सबलपुर के रहिवासियों द्वारा सम्मान समारोह

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के सबलपुर (बभनटोली) रहिवासी कमलनयन ने बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

आयोग द्वारा बीते 21 जून को फाइनल रिजल्ट जारी होने की सूचना जैसे ही कमलनयन को उनके मित्र से मिली, वैसे ही उनके परिवार सहित पूरे गांव में जश्न और हर्ष का माहौल कायम हो गया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से न केवल परिजन, बल्कि समस्त ग्रामवासी गदगद हैं।

ज्ञात हो कि ​कमलनयन स्थानीय शिक्षिका मांडवी शर्मा और अरविंद शर्मा के सुपुत्र हैं। उनकी इस स्वर्णिम सफलता पर सबलपुर मध्यवर्ती पंचायत के पूर्व मुखिया व भाजपा दक्षिणी मंडल के अध्यक्ष दीपक शर्मा के नेतृत्व में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मौके पर समाजसेवी अविनाश कुमार, सुशांत शेखर शर्मा, युवराज कुमार और अनिल शर्मा सहित कई गणमान्य ग्रामीणों ने कमलनयन को अंगवस्त्र व गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया और मिठाई खिलाकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

​अपनी सफलता का मूलमंत्र साझा करते हुए कमलनयन ने बताया कि उन्होंने बिना किसी बाहरी ट्यूशन या कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी (स्वाध्याय) के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। इस यात्रा में उनके माता-पिता का सहयोग अकल्पनीय रहा है। उन्होंने कभी किसी तरह का मानसिक दबाव नहीं बनने दिया और स्वयं कष्ट सहकर भी बेटे के सपनों को संवारा। कमलनयन ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के अटूट विश्वास, हौसला-आफजाई और गुरुजनों के मार्गदर्शन को दिया है।

ध्यान देने योग्य है कि बीपीएससी में 1390वां रैंक लाने वाले ​कमलनयन की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी सुदृढ़ रही है। उन्होंने वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर स्थित गुरु वशिष्ठ विद्यायन से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद बिहार की राजधानी पटना के टीपीएस कॉलेज से इंटरमीडिएट और जयपुर के आर्या कॉलेज से बी.टेक की डिग्री हासिल की। कुछ बड़ा कर गुजरने के जज्बे के कारण उन्होंने अपने करियर के दौरान दो बड़ी नौकरियां भी छोड़ दीं।

उनका चयन पहली बार महिंद्रा फाइनेंस और दूसरी बार श्रीराम फाइनेंस में हुआ था, लेकिन उनका उद्देश्य केवल सर्टिफिकेट पाना नहीं, बल्कि वास्तविक ज्ञान अर्जित कर समाज के लिए कुछ करना था। यही दृढ़ संकल्प आज उनकी सफलता का सबसे बड़ा राज बना। बेटे की इस ऐतिहासिक सफलता पर शिक्षिका माता मांडवी देवी शर्मा और पिता अरविंद शर्मा की आंखों में खुशी के आंसू हैं और उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा है।

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