एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) झारखंड राज्य परिषद ने केंद्र सरकार द्वारा बीते 12 अगस्त को पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इसे अनुमति न देने की मांग की है। पार्टी के प्रदेश सचिव महेन्द्र पाठक ने 14 अगस्त को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह विधेयक झारखंड के जल-जंगल-जमीन, संघीय ढांचे और आदिवासी अधिकारों पर सीधा हमला है।
भाकपा प्रदेश सचिव पाठक द्वारा जारी प्रमुख आपत्तियों के अनुसार एमएमडीआर से संघीय ढांचे का उल्लंघन व् नई धारा 9डी से राज्य के कर लगाने के अधिकार छीने गए। यह अनुच्छेद 246 का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट की अवमानना: वर्ष 2024 के फैसले को पलटने के लिए कानून बनाया गया। आर्थिक हमला: झारखंड के गैर-कर राजस्व का 84.9 प्रतिशत खनन से आता है। इस विधेयक से राज्य को हजारों करोड़ का नुकसान होगा और मंइयां सम्मान, अबुआ आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य कल्याणकारी जैसी योजनाएं बंद होंगी, जिसका सीधा असर झारखंड के रहिवासियों को होगा।
कॉरपोरेट को फायदा: यह विधेयक लिथियम, सोना, चांदी, हीरा, पन्ना, पुखराज, बहु कीमती यूरेनियम जैसे खान खनिज अडानी-अंबानी को सस्ते में सौंपने की साजिश है। जारी विज्ञप्ति में पाठक ने केंद्र सरकार से विधेयक को तुरंत वापस लेने और पेसा, 5वीं अनुसूची के तहत ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य करने की मांग की है।
![]()













Leave a Reply