प्रहरी संवाददाता/बड़बिल (ओड़िशा)। यह घटना इसी वर्ष के बिते 28 अप्रैल की है, जब पुरा देश इस दृश्य को देखकर स्तब्ध हो गया था। इस घटना में एक आदिवासी युवा ने अपनी बहन का कंकाल बैंक ले गया, ताकि उसकी मौत का सबूत बना सके और उसके सेविंग्स अकाउंट से पैसे निकाल सके।
इस हृदय विदारक घटना ने स्थानीय ग्रामीण रहिवासियों में आक्रोश भर दिया और बैंकिंग के तरीकों की जांच शुरू हो गई। इस घटना में मानवीय संवेदना से खिलवाड़ करनेवाले ओडिशा ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है। इस घटना के बाद पूरे भारत के सभी 28 रीजनल रूरल बैंकों (आरआरबी) को ज़्यादा दयालु और ट्रांसपेरेंट कस्टमर सर्विस देने का निर्देश दिया गया है। यह निर्देश उस बदनाम घटना के संदर्भ में आया है जिसमें एक आदिवासी अपनी बहन के सेविंग्स अकाउंट से पैसे निकालने के लिए उसकी मौत के सबूत के तौर पर उसका कंकाल बैंक ले गया था।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता व् पूर्व सीएम नवीन पटनायक को लिखे एक पत्र में इस कार्रवाई की पुष्टि की है। पूर्व सीएम पटनायक को बीते 12 जून को भेजे अपने जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री चौधरी ने कहा कि फाइनेंशियल सर्विसेज़ डिपार्टमेंट ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और बीते माह 29 मई को सभी आरआरबी को एक एडवाइजरी जारी की है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके, खासकर ग्रामीण, आदिवासी और दूसरे कमजोर समुदायों के कस्टमर्स के साथ।
मंत्री ने पत्र में कहा है कि हालांकि, इस घटना को डिपार्टमेंट ऑफ़ फाइनेंशियल सर्विसेज़ ने गंभीरता से लिया है। यह डिपार्टमेंट मानता है कि बैंकिंग ऑपरेशन में तय प्रोसीजर का सख्ती से पालन करना ज़रूरी है, लेकिन यह भी उतना ही ज़रूरी है कि ऐसे प्रोसीजर को पूरी संवेदनशीलता, सहानुभूति और असरदार कम्युनिकेशन के साथ लागू किया जाए, खासकर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में।
पत्र के मुताबिक, ओडिशा ग्रामीण बैंक (ओजीबी) ने अपनी मल्लिपोसी शाखा प्रबंधक को निलंबित कर दिया, जहां यह घटना हुई थी। बैंक ने अपने बोर्ड की मंज़ूरी से एक एडवाइज़री भी जारी की है, जिसमें फील्ड स्टाफ़ को कस्टमर्स को दयालु और ट्रांसपेरेंट सर्विस देने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद डिपार्टमेंट ऑफ़ फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ ने उन निर्देशों को पूरे देश में लागु कर दिया। सभी 28 आरआरबी से कहा गया है कि वे ज़िम्मेदार, दयालु और ट्रांसपेरेंट कस्टमर सर्विस दें। खासकर ग्रामीण, आदिवासी और समाज के कमज़ोर तबके के लिए।
ज्ञात हो कि, यह मामला तब देश भर में चर्चा में आया जब पटनायक ने 2 मई को चौधरी को चिट्ठी लिखकर बैंक शाखा में प्रोसेस में देरी की वजह से परिवार को हो रही मुश्किलों के बारे में चिंता जताई। ओडिशा ग्रामीण बैंक के साथ मामले का रिव्यू करने के बाद, मिनिस्ट्री को बताया गया कि मृतक अकाउंट होल्डर, कालरा मुंडा ने किसी जीवित नॉमिनी को रजिस्टर नहीं कराया था। इसलिए, क्लेम के सेटलमेंट के लिए डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी वारिस की डिटेल्स समेत तय डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत थी। तब बैंक ने कहा कि लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के दखल के बाद, ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स जारी किए गए और 19,402 रुपये की क्लेम रकम जीतू मुंडा और मृतक डिपॉजिटर के दो दूसरे कानूनी वारिसों को जारी कर दी गई।
इस घटना में एक आदिवासी अपनी बहन का कंकाल बैंक ले गया, ताकि उसकी मौत का सबूत बना सके और उसके सेविंग्स अकाउंट से पैसे निकाल सके। इससे ग्रामीण रहिवासियों को आक्रोशित कर दिया था। इसके बाद हीं बैंकिंग के तरीकों की जांच शुरू कर दी गई।
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