एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा स्थित जे एन कॉलेज में ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने कलस्टर सिस्टम लागू होने से परेशान छात्रों से भेंट कर स्थिति का जायजा लिया।
इस अवसर पर एआईएसएफ जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने बताया कि रांची विश्वविद्यालय अंतर्गत रांची शहर में स्थित 5 अंगीभूत महाविद्यालय यथा डोरंडा कॉलेज, मारवाड़ी कॉलेज, जे एन कॉलेज, आर एल एस वाई कॉलेज और एस एस मेमोरियल कॉलेज में विश्विद्यालय के मुख्यालय को मिला कर एक कलस्टर बनाया गया है। कहा कि फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथमेटिक्स, बॉटनी, जूलॉजी, इत्यादि विषय को कलस्टर सिस्टम के तहत महाविद्यालयों में अदला बदली छात्रों की होनी है। इस अदला बदली पर छात्रों ने अपना दु:ख प्रकट किया है।
उन्होंने बताया कि बैच 2025- 29 की इतिहास विभाग की छात्र संजो लकड़ा खूंटी से जे एन कॉलेज आती है। संजो के परिवार में सबसे ज़्यादा शिक्षित संजो है, लेकिन वह नियमित कॉलेज आने जाने में असमर्थ है। इसका कारण है आर्थिक समस्या। बेहद ही कम पढ़े लिखे परिवार से होना और सामाजिक तौर से भी पिछड़े होना। उन्होंने बताया कि संजो कहती है कि कलस्टर सिस्टम अगर लागू हो जाता है तो वह एग्जाम तक नहीं दे पाएगी। जे एन कॉलेज तक पहुंचना ही उसके लिए बड़ी चुनौती है। बहुत मुश्किल से कॉलेज आने के लिए वह पैसे जुटा पाती है।
दूसरी ओर रोशन कुमार और उनके साथी चंदन स्वर्णकार जो गिरिडीह के रहने वाले हैं और ज्योग्राफी की पढ़ाई कर रहे हैं, वे भी कलस्टर सिस्टम के लागू होने की खबर से दु:खी है। दोनों का कहना है कि सेमेस्टर 3 तक की पढ़ाई जे एन कॉलेज से करने के बाद दूसरे कॉलेज जाना उनके लिए मुश्किल है। दूसरे कॉलेज के माहौल में ढलने में वहां के शिक्षकों से घुलने मिलने में और फिर शायद उन्हें फ़िर से नया यूनिफॉर्म भी लेना पड़ जाए। इन सभी बातों से वे और उनका बैच 2023-27 सदमे में है। कई छात्र तो अभी तक इस ख़बर से अनजान है।
ऐसे में एआईएसएफ जिलाध्यक्ष एहतेशाम का कहना है कि छात्र आज भी खुद को शिक्षित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। छात्रों को लेट सेशन की मार तो झेलना ही पड़ रहा है। ऐसे में कलस्टर सिस्टम छात्रों की चिंता बढ़ा रहा है। कहा कि आर्थिक तौर से अति पिछड़े छात्रों की अनदेखी की गई है। रांची के कुलपति अथवा झारखंड सरकार से सभी छात्रों की ओर से एक ही गुज़ारिश है कि फिलहाल के लिए पुराने बैच वाले छात्रों पर कलस्टर सिस्टम को लागू न किया जाए।
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