प्रहरी संवाददाता/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में सीसीएल ढोरी क्षेत्र के एएडीओसीएम (अमलो) परियोजना के हाईवॉल आउटसोर्सिंग माइंस में 25 दिसंबर को एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया।
बताया जाता है कि खदान में ओवर बर्डन (ओबी) धंसने से आउटसोर्सिंग कंपनी में कार्यरत पंप ऑपरेटर हिमांशु राज बुरी तरह घायल हो गया। घटना के बाद आनन- फानन में उसे बोकारो ले जाया गया, जहां से उसकी मौत की खबर आ रही है। मृतक मैनसोल लिमिटेड कंपनी में कार्यरत था, जो बंगाल की बताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अमलो परियोजना में आउटसोर्सिंग कार्य के दौरान अचानक ओबी का बड़ा हिस्सा खिसक कर गिर गया। हादसा इतना अचानक था कि कर्मी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। साथी कर्मियों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया और प्रबंधन को सूचना दी, लेकिन तब तक हिमांशु राज ओबी के निचे दब चूका था।
ज्ञात हो कि, सीसीएल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा के बड़े – बड़े दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत में सुरक्षा इंतजाम नाकाफी साबित हुए। सवाल उठ रहा है कि क्या ओबी डंप की स्थिरता (स्टेबिलिटी) की नियमित जांच की गई थी? क्या आउटसोर्सिंग कर्मियों को पर्याप्त सेफ्टी ट्रेनिंग और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे?

उक्त घटना के बाद परियोजना क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया। मजदूर संगठनों और स्थानीय रहिवासियों ने मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा, एक आश्रित को नौकरी तथा पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जमसं के ढ़ोरी एरिया सचिव विकास कुमार सिंह और एटक नेता जवाहर लाल यादव के अनुसार आउटसोर्सिंग के नाम पर सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है, जिसका खामियाजा मजदूरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। देखना यह है कि जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है। सवाल साफ है जब हर साल खान सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है, तो फिर ऐसे हादसे क्यों नहीं रुक पा रहे? क्या मजदूरों की जान सिर्फ आंकड़ों तक सिमट कर रह गई है?
बताया जाता है कि इस दौरान यूनियन नेताओ ने परियोजना के प्रबंधक मानव संसाधन अविनाश सिंहा से कार्यालय मे वार्ता किया। जिसमें जमसं के ढोरी क्षेत्रीय अध्यक्ष धीरज पांडेय, वेलफेयर सदस्य ओम शंकर सिंह सहित आशीष झा, नवीन श्रीवास्तव, जयनाथ मेहता आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।
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