ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। सर्वोच्च न्यायालय, झारखंड उच्च न्यायालय एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बोकारो के निर्देशानुसार 2 अक्टूबर को जिला के हद में तेनुघाट उपकारा में जेल अदालत-सह-कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में न्यायिक पदाधिकारी दिग्विजय नाथ शुक्ला, जेल अधीक्षक अरुणाभ, अधिवक्ता सुभाष कटरियार, गिरिवर कुमार महतो, जेलर सूरज मोदी, आशीष कुमार, इस्तियाक अंसारी सहित उपस्थित सभी गणमान्य जनों ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर फूल-माला अर्पित की।
शिविर के दौरान जेल बंदियों को संबोधित करते हुए प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी दिग्विजय नाथ शुक्ला ने सभी को गांधी जयंती और शास्त्री जयंती की बधाई दी। उन्होंने दोनों महापुरुषों के जीवन पर संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें उनके मार्गदर्शन और सिद्धांतों पर चलना चाहिए। कहा कि महात्मा गांधी ने अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी दिलाई। हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए और स्वदेशी अपनाना चाहिए, जिससे हमारी सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है।
स्वागत भाषण देते हुए जेल अधीक्षक अरुणाभ ने बंदियों को उनके अधिकार एवं कर्तव्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जहां हमारे अधिकार हैं, वहीं हमारे कर्तव्य भी हैं। जैसे सड़क पर चलना हमारा अधिकार है, वहीं हमारा कर्तव्य है कि हम हमेशा बाएं चलें, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। अधिवक्ता गिरिवर कुमार महतो ने बताया कि जो बंदी अधिवक्ता रखने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें जेल में आवेदन देने के बाद निःशुल्क अधिवक्ता मुहैया कराया जाता है। कहा कि जेल में बंदियों को कई प्रकार की सुविधाएं दी जाती हैं।
मंच संचालन कर रहे अधिवक्ता सुभाष कटरियार ने बताया कि जेल अदालत के साथ-साथ मेडिकल कैंप का भी आयोजन किया गया, जिसमें चिकित्सकों द्वारा बंदियों की स्वास्थ्य जांच की गई। उन्होंने बंदियों को दहेज उत्पीड़न के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दहेज लेना और देना दोनों अपराध हैं, इसलिए इस अपराध से बचना चाहिए। इस अवसर पर बंदियों ने भी अपनी समस्याएं रखीं, जिसके निराकरण का आश्वासन न्यायिक दंडाधिकारी ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन जेलर सूरज मोदी ने किया। मौके पर डॉ आनंद, आशीष कुमार, इस्तियाक अंसारी, विजय कुमार, मदन प्रजापति सहित तमाम जेलकर्मी मौजूद थे।
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