हरिहरक्षेत्र विचार उत्सव में बचपन खतरे में है पुस्तक का भव्य लोकार्पण
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर के विश्व प्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ की पावन धरती पर 12 अप्रैल को हरिहरक्षेत्र विचार उत्सव-2026 का भव्य शंखनाद किया गया। मंदिर के सत्संग भवन में आयोजित इस बौद्धिक समागम में न केवल साहित्य की धारा बही, बल्कि आधुनिकता की आंधी में खोते जा रहे बचपन और संस्कारों पर भी गंभीर मंथन किया गया।
अवसर था वरिष्ठ साहित्यकार सारंगधर प्रसाद सिंह की बहुचर्चित पुस्तक बचपन खतरे में है के लोकार्पण का। इस अवसर पर साहित्यकार सिंह की चर्चित कृति बचपन खतरे में है का लोकार्पण सह विमोचन किया गया।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में सेवा के लिए पांच प्रतिभाओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। जिसमें रेलवे अस्पताल सोनपुर के मुख्य नर्सिंग ऑफिसर अनीता कुमारी, मेडिकल छात्रा मयूरी गौतम, कार्टूनिस्ट एवं गीतकार अजय कुमार, प्रगतिशील किसान संजय कुमार एवं चिकित्सक डॉ अमरेश कुमार को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र दिया गया। वहीं हरिहरनाथ मंदिर न्यास समिति के सदस्य प्रो. चंद्र भूषण तिवारी, मिथिलेश सिन्हा एवं कृष्णा प्रसाद ने पूर्व डीजीपी डॉ डी एन गौतम को अंग वस्त्रम एवं बाबा हरिहरनाथ का मोमेंटो देकर सम्मानित किया। पूर्व डीजीपी ने बाबा हरिहरनाथ, सूर्य मंदिर एवं शनि मंदिर में पूजा की। लोक सेवा आश्रम के महंत संत विष्णुदास उदासीन उर्फ मौनी बाबा ने अंगवस्त्र से उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद कपिलदेव सिंह तथा संचालन वरिष्ठ साहित्यकार सुरेंद्र मानपुरी ने किया।
मौके पर अपने संबोधन में पूर्व डीजीपी डॉ डीएन गौतम ने शब्दों की महत्ता और मर्यादा पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे शब्द सुगंध छोड़ने वाले और नवनिर्माण करने वाले होने चाहिए। बिना सोचे बोला गया शब्द कोई गाइडेड मिसाइल नहीं है जिसे दागा और भूल गए। मुंह से निकल गया कहकर कोई भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है।
अध्यात्म और आधुनिकता के द्वंद्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि बाहरी पूजा-पाठ अक्सर अहंकार को पोषित करता है, जबकि सच्चा अध्यात्म मौन और शब्द-संयम में है। उन्होंने सावधान किया कि विज्ञान एक अच्छा सेवक तो है, पर बुरा स्वामी भी। आज मनुष्य यंत्र का सहायक नहीं, बल्कि उसका सेवक बन गया है, जिससे जीवन की लय टूट गई है।
संचालन कर रहे हरिहरक्षेत्र विचार उत्सव के संयोजक साहित्यकार सुरेन्द्र मानपुरी ने कहा कि सारंगधर प्रसाद सिंह की पुस्तक बचपन खतरे में भौतिकवादी युग में खोते बचपन को बचाने का एक गंभीर प्रयास है। कहा कि पुस्तक का मूल स्वर भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना है। उन्होंने कहा कि आज का समाज बच्चों को आधुनिक सुख-सुविधाएं तो दे रहा है, लेकिन वह समय और संस्कार देने में विफल हो रहा है जो उनके चरित्र निर्माण के लिए अनिवार्य हैं। कहा कि परिवार बच्चों के व्यक्तित्व की प्रथम पाठशाला है।

तकनीकी के दौर में मोबाइल, सोशल मीडिया और इंटरनेट के मायाजाल ने बच्चों को शारीरिक रूप से निष्क्रिय और मानसिक रूप से एकाकी बना दिया है। संवादहीनता के कारण पीढ़ियों के बीच की दूरी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नैतिक पतन पर चिंता व्यक्त करती है कि संयुक्त परिवारों का टूटना और पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण बच्चों को उनके मूल से काट रहा है। उन्होंने उक्त पुस्तक को हर अभिभावक के लिए पठनीय गीता के समान बताया।
प्रगतिशील किसान एवं लेखक जितेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि संयुक्त परिवारों के टूटने से बच्चों से दादी-नानी के संस्कार छूट गए हैं। पटना उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं मेरी यूरोप यात्रा पुस्तक के लेखक महेन्द्र प्रताप ने वसुधैव कुटुंबकम को ही सच्चा मानव धर्म बताया और लिंकन का उदाहरण देते हुए बच्चों को ज्ञान के साथ आत्म-सम्मान सिखाने पर जोर दिया।
समारोह को हरिहरनाथ मंदिर न्यास के सदस्य प्रो.चंद्रभूषण तिवारी, युवा एकता मंच के संयोजक संजीत कुमार चौधरी, पुस्तक के लेखक सारंगधर प्रसाद सिंह एवं अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। कवि ताड़क नाथ सिंह एवं सिवान के शिक्षक सुरेन्द्र सिंह ने काव्य पाठ किया। इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में हिंदी एवं बज्जिका के समर्थ कवि शिक्षाविद कपिलदेव सिंह ने अनेक उदाहरणों द्वारा पुस्तक की मूल भावना पर अपने विचार व्यक्त किए।
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