रहिवासियों ने नम आंखों से किया दिवंगत चौबे का स्मरण
प्रहरी संवाददाता/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के प्रख्यात शिक्षाविद् एवं समाजसेवी स्वर्गीय सुरेश कुमार चौबे की 20वीं पुण्यतिथि 25 मार्च को श्रद्धा और भावनाओं के साथ मनाई गई। इस अवसर पर कसमार चौक स्थित राम मंदिर प्रांगण के समीप दिवंगत की प्रतिमा पर रहिवासियों ने पुष्प अर्पित कर एवं माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले नेता शकुर अंसारी ने कहा कि स्वर्गीय चौबे विलक्षण प्रतिभा के धनी, प्रखर समाजसेवी और शिक्षा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व थे। उन्होंने कसमार क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगाने में अहम भूमिका निभाई। उनके अथक प्रयासों से यहां विद्यालय की स्थापना हुई, जो आज प्लस टू स्तर तक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
निरंजन महतो ने दिवंगत चौबे के पदचिन्हों पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि चौबे जैसे प्रकांड विद्वान और समाजसेवी विरले ही मिलते हैं। वहीं रंजीत जायसवाल ने कहा कि चौबेजी में अद्भुत नेतृत्व क्षमता थी और वे सभी के साथ आत्मीयता का भाव रखते थे। रतन कुमार चौबे ने कहा कि स्वर्गीय चौबे के सिद्धांतों पर चलकर ही कसमार आज विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से ही कसमार और जरीडीह में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम हुई, जिसे आज भी रहिवासी निभा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि चाहे मोहर्रम के जुलूस में हिंदुओं का लाठी खेलना हो या रामनवमी के जुलूस में मुस्लिम समुदाय द्वारा शरबत की व्यवस्था करना। सभी परंपराएं स्वर्गीय चौबे की देन हैं। सभा में उपस्थित दिवंगत के पौत्र एवं झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता शीतल समीर चौबे ने कहा कि हम सभी को उनके आदर्शों पर चलते हुए समाज में प्रेम, एकता और सौहार्द की ज्योति जलाए रखनी चाहिए।
इस दौरान रहिवासी अपने गुरु और महान समाजसेवी को याद कर भावुक नजर आए। श्रद्धांजलि सभा का संचालन निरंजन जायसवाल ने किया। मौके पर रतन कुमार चौबे, कृष्ण मोहन चौबे, रंजीत जायसवाल, निरंजन जायसवाल, निरंजन महतो, गोलकनाथ ठाकुर, सुखदेव गोस्वामी, जयदेव कुमार, हर्षित चौबे, अंकित चौबे, धीरेंद्र प्रजापति, जगेश्वर गोसाई, परमेश्वर गोसाई, दशरथ पासवान, प्रदुमन कुमार, काजल गोस्वामी, शांति पदो पाल, कमलेश कुमार सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।
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