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डुमरी बुजुर्ग में मां कालरात्रि की पूजा से वातावरण हुआ भक्तिमय

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। चैत्र नवरात्र के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के शुभ अवसर पर 25 मार्च को सारण जिला के हद में सोनपुर अंचल स्थित डुमरी बुजुर्ग गांव में मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप देवी कालरात्रि की विशेष पूजा-अर्चना विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा किए जा रहे दुर्गा सप्तशती के पाठ और जय माता दी के उद्घोष से संपूर्ण वातावरण पवित्र और भक्तिमय बना है।

मां कालरात्रि को समर्पित किया गया विशेष वस्त्र

इस अवसर पर मां कालरात्रि मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल रहा। इस पावन बेला में मंदिर सेवा समिति के सचिव जितेंद्र कुमार ‘जीतू’ ने मां कालरात्रि के भव्य पिंडी स्वरूप को श्रद्धापूर्वक वस्त्र (झूल) अर्पित किया। इस दौरान उन्होंने पूरे समाज में सुख-शांति, अमन-चैन और आपसी सौहार्द बनाए रखने की मंगल कामना की। अनुष्ठान का संचालन प्रधान पुजारी ब्रजेशानंद मिश्र एवं सोना बाबा द्वारा विधिवत मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। विशेष पूजा के दौरान माता की भव्य आरती हुई और घी के दीप प्रज्वलित किए गए।​

जीतू ने मंदिर परिसर में स्थित प्रथम पूज्य गणपति, वीर बजरंगबली, भगवान शंकर और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र की भी भावपूर्ण पूजा-अर्चना की। मंदिर समिति की ओर से देवी को फल, फूल, मेवा और मिष्ठान का भोग लगाया गया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय एवं आसपास की श्रद्धालु महिलाओं ने उपस्थित होकर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।

मंत्रोच्चार और अनुष्ठान से गूंजा मंदिर परिसर

भक्तों ने आज हवन के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। मंदिर में हर ओर या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: का मंत्र जाप गूंज रहा है। कोई भक्त सिद्ध मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः के माध्यम से देवी को प्रसन्न करने में तल्लीन है, तो कोई भय और बाधाओं से मुक्ति के लिए स्तुति कर रहा है।

पौराणिक महत्व: ब्रह्माजी ने भी की है स्तुति

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दस महाविद्याओं में प्रथम देवी काली ही सप्तम दुर्गा कालरात्रि हैं। दुर्गा सप्तशती में स्वयं ब्रह्माजी ने इन्हें महाविद्या, महामाया और भयंकर कालरात्रि कहकर इनकी स्तुति की है। श्रीदेव्यथर्वशीर्षम् के 11वें श्लोक में इन्हें काल का भी नाश करने वाली पापनाशिनी कल्याणकारिणी बताया गया है। वाल्मीकि रामायण के सुंदर कांड के अनुसार, रावण के विनाश के लिए देवी कालरात्रि ने ही सीता के रूप में अवतार लिया था।

*​भौगोलिक और धार्मिक महत्ता*

पटना-छपरा एनएच-19 के किनारे, बाबा हरिहरनाथ और मां अंबिका भवानी के मध्य ‘सारण गढ़’ के ऊंचेडीह पर मां कालरात्रि का भव्य मंदिर स्थित है। मार्कण्डेय पुराण में वर्णित मां दुर्गा का यह स्वरूप यहीं विराजमान है। विशेष बात यह है कि इसी स्थान के समीप मही नदी का गंगा से संगम होता है।

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था: क्या कहते हैं पुजारी व समिति

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित ब्रजेशानंद मिश्र ने बताया कि:
​”यह एक जागृत मनोकामना सिद्ध पीठ है। यहाँ निश्छल मन से मन्नत मांगने वाले भक्तों की हर मुराद पूरी होती है। दूर-दराज से भक्त अपनी बाधाओं की मुक्ति के लिए यहाँ माता की शरण में आते हैं। कालरात्रि मंदिर समिति के अध्यक्ष विजय सिंह ने जानकारी दी कि मन्नत पूरी होने पर भक्त माता को 22 मीटर की चुनरी भेंट करते हैं। उन्होंने बताया कि भादो अमावस्या की रात को यहाँ माता की विशेष पूजा आयोजित की जाती है और नवरात्रि के दौरान पूरा गांव माता की भक्ति में सराबोर रहता है।

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