समय पर स्क्रीनिंग से गंभीर आनुवंशिक बीमारियों की रोकथाम संभव-उपायुक्त
थैलेसीमिया एवं सिकल सेल की समय पर पहचान के लिए स्क्रीनिंग पर जोर
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। जेएचपीईगो एवं विकास सारथी के संयुक्त तत्वावधान में प्रोजेक्ट स्वास्थ्य के तहत संवेदीकरण कार्यशाला का शुभारंभ 21 अगस्त को बोकारो के सेक्टर-वन स्थित होटल हंस रेजेंसी सभागार में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य थैलेसीमिया एवं सिकल सेल जैसी आनुवंशिक बीमारियों की रोकथाम, समय पर पहचान, स्क्रीनिंग, काउंसलिंग एवं उपचार को लेकर संबंधित पदाधिकारियों एवं हितधारकों को जागरूक एवं संवेदनशील बनाना है।
आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए बोकारो जिला उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में केवल उपचार ही नहीं, बल्कि बीमारियों की रोकथाम एवं समय पर पहचान सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संभावित मरीजों की प्रारंभिक अवस्था में स्क्रीनिंग कर उनकी पहचान एवं आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने से गंभीर बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है और अस्पतालों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया एवं सिकल सेल जैसी आनुवंशिक बीमारियों की स्क्रीनिंग को पूरे बोकारो जिले में व्यापक स्तर पर संचालित करने की आवश्यकता है। इसके लिए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, कोल इंडिया एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं को मिलकर कार्य करना होगा।
उपायुक्त ने स्क्रीनिंग के बाद चिन्हित मरीजों का कन्फर्मेटरी टेस्ट, काउंसलिंग, रेफरल एवं नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग से प्राप्त डेटा को स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ते हुए चिन्हित मरीजों की नियमित ट्रैकिंग की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि मरीज को समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने सिविल सर्जन को जिले में स्वास्थ्य संबंधी प्रमुख चुनौतियों एवं प्राथमिकताओं को चिन्हित करते हुए समग्र कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही, परियोजना की प्रगति एवं मरीजों के फॉलो-अप की नियमित समीक्षा करने को कहा।
मौके सिविल सर्जन डॉ ए.बी. प्रसाद ने कहा कि थैलेसीमिया एवं सिकल सेल जैसी आनुवंशिक बीमारियों की समय पर पहचान के लिए स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है। कहा कि जिले के 16 स्वास्थ्य केंद्रों पर स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। स्क्रीनिंग के बाद मरीजों की कन्फर्मेटरी जांच, काउंसलिंग, रेफरल एवं नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल के ब्लड सेंटर के माध्यम से थैलेसीमिया एवं सिकल सेल मरीजों को आवश्यकतानुसार नियमित रूप से रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रोजेक्ट स्वास्थ्य के माध्यम से स्क्रीनिंग एवं जागरूकता को और व्यापक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यशाला में परियोजना के उद्देश्यों, स्क्रीनिंग प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं एवं स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान उप विकास आयुक्त शताब्दी मजमूदार, प्रशिक्षु आईएएस डॉ अरविंद राधाकृष्णन, एपीआरओ अविनाश कुमार सिंह, जेएचपीईगो प्रतिनिधि डी. कुलभूषण सिंह, कोल इंडिया प्रतिनिधि संजीत कुमार, विकास सारथी के सचिव रंजन कुमार, जन जागरण केंद्र के सचिव संजय सिंह के अलावा सदर अस्पताल एवं अनुमंडल अस्पताल के अधीक्षक, रेफरल अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।
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