एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। युजीसी-नेट में सामने आई हालिया गड़बड़ियों और इससे पहले नीट-यूजी परीक्षा को लेकर उठे गंभीर सवालों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी द्वारा परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा को ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) ने देर से उठाया गया जरूरी कदम बताया है। साथ ही संगठन ने सरकार से परीक्षा व्यवस्था की नाकामियों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
एआईएसएफ रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने 21 अगस्त को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े परीक्षा तंत्र में बार-बार गड़बड़ियां सामने आना महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर गंभीर संकट है। सरकार एनटीए की नाकामी पर पर्दा डालने के बजाय जिम्मेदारी तय करे।
जिलाध्यक्ष एहतेशाम के अनुसार एआईएसएफ ने एनटीए द्वारा लगभग 600 विशेषज्ञों को हटाने और नए विशेषज्ञों को शामिल करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि विशेषज्ञों को हटाना अपने आप में सुधार का प्रमाण नहीं है। सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए कि पुराने विशेषज्ञों को हटाने का आधार क्या था और नए विशेषज्ञों की नियुक्ति किस पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की गई।
एहतेशाम परवीन ने कहा कि परीक्षा सुधार के नाम पर केवल चेहरों और व्यवस्थाओं को बदलने से काम नहीं चलेगा। सरकार को यह बताना होगा कि गलतियों के लिए जिम्मेदार कौन है और जवाबदेही कब तय होगी। उन्होंने कहा कि नीट-यूजी विवाद के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा व्यवस्था को लेकर पहले ही गहरा अविश्वास पैदा हुआ है। यूजीसी-नेट की गड़बड़ियों ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा सुधार केवल बैठकों, प्रेस विज्ञप्तियों और नई घोषणाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। छात्रों की वर्षों की मेहनत किसी प्रशासनिक लापरवाही, पेपर लीक या परीक्षा तंत्र की कमजोरी की भेंट नहीं चढ़नी चाहिए। एहतेशाम परवीन ने कहा कि अगर सरकार छात्रों से फीस और वर्षों की मेहनत के बदले एक निष्पक्ष परीक्षा तक सुनिश्चित नहीं कर सकती, तो उसे अपनी प्राथमिकताओं पर गंभीरता से पुनर्विचार करना होगा।
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। कहा कि एआईएसएफ ने मांग की है कि परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई तथा एनटीए की पूरी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
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