सबलपुर के 17 स्वतंत्रता सेनानियों को केंद्र सरकार ने दिया था पेंशन सम्मान
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। भारतीय जनता पार्टी की तिरंगा यात्रा इस बार सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि इतिहास को नमन करने का अवसर बन गई। तिरंगा यात्रा के माध्यम से सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के सबलपुर दियारे के ख्याति प्राप्त क्रांतिवीर अंग्रेजों की चूलें हिलानेवाले अमर शहीद रामवृक्ष ब्रह्मचारी सहित दियारे के सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
सबलपुर दियारा की ऐतिहासिक खूबसूरती यही है कि यहां के किसानों ने अंग्रेजों, उनके जमींदारों, नवाबों और जासूसों से सीधा लोहा लिया। तब सबलपुर बभनटोली के एक दर्जन से अधिक किसानों की जमीनें नीलाम हो गईं, पर वे भारत माता की जय का उद्घोष करते रहे और यातनाएं सहते रहे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक मोड़ 8-9 अगस्त 1942 को आया। 8 अगस्त को बंबई (मुंबई) के ग्वालिया टैंक मैदान में कांग्रेस महासमिति ने भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया और महात्मा गांधी ने करो या मरो का अमर मंत्र दिया। 9 अगस्त को सभी बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन स्वतःस्फूर्त जन-आंदोलन बन गया।
इस दौरान 10 अगस्त 1942 तक यह आंदोलन भाषणों से निकलकर देशव्यापी जन-विद्रोह बन चुका था। इसी कड़ी में सोनपुर के सबलपुर दियारा ने भी अपना गौरवशाली अध्याय लिखा। इसी दिन दियारा के प्रसिद्ध क्रांतिकारी रामवृक्ष ब्रह्मचारी को अंग्रेज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बभनटोली रहिवासी ब्रह्मचारी बकाश्त किसान आंदोलन में स्वामी सहजानंद सरस्वती, राहुल सांकृत्यायन, नागार्जुन और ब्रह्मदेव सिंह जैसे नेताओं के साथ सक्रिय थे। उनका नाम चर्चित खाजेकलां बम कांड (पटना बम कांड) से भी जुड़ा था। लंबी यातनाओं के बाद 30 अगस्त 1945 को हजारीबाग सेंट्रल जेल में उन्होंने शहादत दी।
देश के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका के लिए केंद्र सरकार ने सबलपुर दियारा के 16 क्रांतिकारियों को सम्मान स्वरूप पेंशन प्रदान कर उनके योगदान को नमन किया था। सम्मानित स्वतंत्रता सेनानियों में रामजीनिस सिंह, ब्रह्मदेव सिंह, हरनंदन सिंह, भागवत सिंह, रामसेवक सिंह, रामस्वरूप सिंह, दरबारी सिंह, रामसागर सिंह, रामखुशी सिंह, रामाशीष सिंह, शिवजी सिंह, रामकिशोर सिंह, मटुकधारी सिंह, यमुना राय, देवकी नंदन राय, रामधारी सिंह और सिंघेश्वर सिंह (सभी दिवंगत) शामिल हैं। केंद्र सरकार के तिरंगा सम्मान यात्रा ने एक बार फिर याद दिलाया कि आजादी की इमारत इन्हीं गुमनाम नायकों के सतत् संघर्ष का नतीजा है।
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