धरती को संकट से बचाना है तो पौधारोपण ही एकमात्र विकल्प-राम बिलास शांडिल्य
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को पर्यावरण भारती द्वारा सारण जिला के हद में सोनपुर के डी.एन. पब्लिक स्कूल परिसर में फलदार वृक्ष (अमरूद) लगाकर पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक तथा अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली के सदस्य राम बिलास शांडिल्य ने संगठन के सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से वर्ष 2008 में बिहार की राजधानी पटना के राजेंद्र नगर में स्वांत रंजनजी की प्रेरणा से इस संस्था की स्थापना हुई थी। शुरुआत में महज 11 पर्यावरण प्रहरियों से शुरू हुआ यह कारवां आज विशाल रूप ले चुका है। वर्तमान में 2,353 पर्यावरण प्रहरी विभिन्न जिलों में निरंतर पौधारोपण अभियान चला रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूक करना है।
शाण्डिल्य ने प्राकृतिक संतुलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि धरती पर न्यूनतम 33 प्रतिशत वनों का होना अनिवार्य है, लेकिन बढ़ती आबादी और जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण अब यह घटकर केवल 15 प्रतिशत रह गया है। यही कारण है कि आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, भूस्खलन, भूकंप, बादल फटना, चक्रवात, वज्रपात और बाढ़ जैसी भयंकर प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रही है। कहा कि कोरोना काल में हमने ऑक्सीजन की भारी किल्लत को भी झेला है। इन संकटों से उबरने का विज्ञान के पास भी पौधारोपण के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने अपील की कि हर व्यक्ति अपने घरों के आसपास कम से कम 10 पौधे अवश्य लगाए।
संस्था की उपलब्धियों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि पर्यावरण भारती द्वारा अब तक कुल 1,23,853 पौधे लगाए जा चुके हैं। हालांकि, इनमें से करीब 20 प्रतिशत पौधे देखरेख के अभाव या पशुओं द्वारा नष्ट हो गए, लेकिन संस्था का यह अभियान भविष्य में भी अनवरत जारी रहेगा। कहा कि हमारा आगामी लक्ष्य 5 लाख पौधे लगाने का है।
कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय पर्यावरणविद डॉ अवधेश कुमार ने इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा पहली बार 5 जून 1974 को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था, जिसका मूल उद्देश्य वैश्विक स्तर पर आमजनों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रोत्साहित करना है।
डी.एन. पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ अवधेश कुमार, राम बिलास शाण्डिल्य, अयांश कुमार, प्रो. (डॉ) अशोक कुमार, अखिलेश कुमार, अरुण कुमार, भरत कुमार, सौरभ कुमार, सुजय कुमार और डॉ अविनाश कुमार सहित कई गणमान्य पर्यावरण प्रेमी उपस्थित थे।
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