आमजनों को कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए-जीएम
एन. के. सिंह/बेरमो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में सीसीएल के बीएंडके प्रक्षेत्र में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को उत्साह और जागरूकता के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत बीएंडके क्षेत्र के महाप्रबंधक संजय कुमार झा द्वारा पौधारोपण कर की गई। इसके बाद उपस्थित जनों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गयी।
जानकारी के अनुसार इस अवसर पर करगली ऑफिसर कलब में संडे बाजार स्थित सीसीएल अनुदानित शिशु विकास विद्यालय के 42 छात्र तथा चिल्ड्रेन पैरा डाइज स्कूल के 25 छात्र रहे। उपरोक्त दोनों विद्यालय के 67 छात्र शामिल हुए। जिसमे निबंध, भाषण, चित्र कला तथा स्लोगन प्रतियोगिता शामिल था। इस दौरान छात्रों ने भाषण में विश्व पर्यावरण को लेकर विस्तार पूर्वक अपनी बाते रखी।
कहा गया कि मानव एवं पर्यावरण एक दूसरे पर निर्भर है। पर्यावरण जैसे कि जलवायु , प्रदूषण या वृक्षों का कम होना मानव शरीर पर इसका सीधा प्रभाव डालता है। मानव द्वारा अपनाए गए अच्ची आदते, वृक्ष से कहीं ज्यादा मनुष्य की बुरी आदतें कि अत्यधिक पानी बर्बाद करना, प्रदूषण फैलाना, पानी दूषित करना, अंधाधुंध पेड़ो की कटाई करना आदि पर्यावरण को प्रभावित करती है।
इस अवसर पर प्लास्टिक हटाओ, पेड़ लगाओ का संदेश देते हुए विभिन्न कार्यक्रमआयोजित किए गए, जिनमें अधिकारियों, कर्मचारियो से लेकर स्कूली बच्चों तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। क्षेत्र के पर्यावरण अधिकारी विनय अंचल ने भी पर्यावरण के बारे मे विस्तार पूर्वक बच्चो को जानकारी दी। मुख्य अतिथि जीएम संजय कुमार झा ने विजेता बच्चो को उपहार देकर सम्मानित किया। उन्होंने पर्यावरण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत वर्ष 1972 में हुई थी, जिसमें 150 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
जीएम ने कार्यक्रम में उपस्थित जनों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे कदम उठाएं, जैसे बिजली और पानी की बचत करना तथा हर वर्ष कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना। उन्होंने मां के नाम एक पेड़ अभियान के तहत भी आमजनों को प्रेरित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में बीएंडके क्षेत्र के भू राजस्व पदाघिकारी शंकर झा, सीएसआर मैनेजर संजीत कुमार, विद्यालय के शिक्षक वृंद, निदेशक राम अयोध्या सिंह, तिजन करमाली आदि शिक्षक/शिक्षिकओं ने योगदान दिया।
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