रसोई गैस 2.5 से 4 हजार और व्यावसायिक गैस 5 से 7 हजार में बीके
प्रहरी संवाददाता/मुंबई। देश में एलपीजी रसोई गैस की बड़े पैमाने पर कमी महसूस की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ चेंबूर इलाके में एलपीजी रसोई गैस से लेकर व्यावसायिक एलपीजी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी उफान पर है। रसोई गैस 3 से 4 हजार और व्यावसायिक एलपीजी गैस 5 से 7 हजार में बेचे जाने की बात सूत्र बता रहे हैं। इस तरह के मामले को गंभीरता से लेते हुए मुंबई पुलिस सहित एलपीजी गैस उत्पादक कंपनियों ने कालाबाजारी पर लगाम कसने के लिए टोल फ्री नंबर जारी किया है। बावजूद इसके कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में देवनार पुलिस ने राशनिंग विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक टेंपो से 27 गैस सिलेंडर बरामद किया गया। इस मामले में एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया था। जिसकी जांच देवनार पुलिस कर रही है।
गौरतलब है कि खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण देश में एलपीजी गैस की कमी महसूस की जा रही है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध जमाखोरी में जुटे हैं। इसे रोकने के लिए राशनिंग विभाग और पुलिस की ओर से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इन विभागों की लगातार निगरानी और संयुक्त कार्रवाई में पुरे महाराष्ट्र में 25 से अधिक मामले दर्ज किये गये हैंl लेकिन अब तक सभी मामले जांच के दायरे में ही दम तोड़ रहीं हैं।
रसोई गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध जमाखोरों पर अब तक सख्त कार्रवाई नहीं होने के करण चेंबूर सहित अक्खी मुंबई में कालाबाजारी करने वाले और अवैध जमाखोरों द्वारा गैस सिलेंडरों की हेरा फेरी ब दस्तूर जारी है। पुलिस के मुताबिक हाल ही में देवनार, मुंबई के अंबोली और चारकोप पुलिस थाना क्षेत्र में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडरों की चोरी और हेराफेरी के मामले दर्ज हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में चेंबूर की कुछ गैस एजेंसियों द्वारा एलपीजी गैस सिलेंडरों से भरे वाहनों को सार्वजानिक स्थानों को खड़ी कर लोगों को दिखाया जाता है कि हम ईमानदारी से रसोई गैस की आपूर्ति कर रहे हैं। लेकिन इस दिखावे के आड़ में बड़े पैमाने पर कालाबाजारी का खेल चलता है। इस मुद्दे पर चेंबूर के समाजसेवकों का कहना है कि कालाबाजारी और अवैध जमाखोरी को रोकने के लिए राशनिंग विभाग और पुलिस की कार्रवाई नाकाफी है।
कालाबाजारी को रोकने के लिए इसकी तह तक जाने की जरूरत है। यानि उत्पादक कंपनियों से कितना माल निकला और कितने उपभोक्ताओं को कब कब दिया गया , तभी कालाबाजारी पर नकेल कसा जा सकता है। क्योंकि कालाबाजारी करने वालों का नेट वर्क इतना फैला हुआ है कि उसे पकड़ पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।
Tegs: #Chembur: People are worried about the shortage of cooking gas, but black marketing continues
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