प्रहरी संवाददाता/कसमार (बोकारो)। झारखंड के रामगढ़ जिला के हद में गोला वन क्षेत्र में जंगली हाथियों का कहर लगातार भयावह होता जा रहा है।
बताया जाता है कि 3 अप्रैल को एक बार फिर हाथियों के झुंड ने तांडव मचाते हुए तीन रहिवासियों को कुचलकर मार डाला, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश देखा जा रहा है।
वन क्षेत्र के ग्रामीणों के अनुसार, यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कई महीनों में 15 से 20 रहिवासियों की जान जंगली हाथियों के हमले में जा चुकी है, बावजूद इसके वन विभाग और सरकार की व्यवस्था पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि जंगल क्षेत्र के रहिवासी शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
ज्ञात हो कि हाथियों के हमले में मृतकों के परिजनों को महज ₹4 लाख मुआवजा देने की सरकारी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय रहिवासियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि एक इंसान की जान की कीमत इतनी कम नहीं हो सकती।
केंद्रीय वन पर्यावरण सुरक्षा समिति के उपाध्यक्ष विष्णु चरण महतो ने कड़े शब्दों में सरकार और विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी है, जिससे हालात और बिगड़ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि इस कमी को तत्काल पूरा किया जाए। उन्होंने प्रत्येक प्रखंड में वन बचाव समिति को सक्रिय करने की मांग करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर निगरानी और त्वरित कार्रवाई के बिना इस संकट पर काबू पाना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस गंभीर समस्या को लेकर भारत सरकार के केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री और झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री सह वन एवं पर्यावरण मंत्री को पत्र भेजकर मुआवजा राशि बढ़ाने और ठोस कदम उठाने की मांग की गई है। समिति ने मांग की है कि मृतकों के आश्रितों को कम से कम ₹10 लाख और घायलों को ₹4 लाख मुआवजा दिया जाए।
फिलहाल, जंगली हाथियों के कहर से लगातार हो रही मौतों के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता ने क्षेत्र के रहिवासियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
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