छठ व्रती महिलाओं का 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास शुरु
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। लोक आस्था का महापर्व चैती छठ के दूसरे दिन 23 मार्च को व्रतियों ने खरना व्रत का अनुष्ठान पूरा किया। इस अनुष्ठान के पूरा होने के साथ ही व्रती महिलाओं का 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास शुरू हो गया। इस दिन व्रतियों ने दिन भर उपवास रखा और शाम को पूजा के बाद ही प्रसाद ग्रहण किया।
बताया जाता है कि छठ व्रतियों ने सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित सूर्य मंदिर की प्रदक्षिणा और पूजा -अर्चना भी की। सूर्य मंदिर के पुजारी अनिल झा ने बताया कि खरना व्रत को शुद्धिकरण का पर्व भी कहा जाता है। व्रतियों ने आज नारायणी एवं गंगा नदी के घाटों, छठ पोखरों, कृत्रिम तालाबों आदि पर संध्याकालीन बेला में शुद्ध मिट्टी से बने नए चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर गुड़ की खीर (रसियाव) और गेहूं की रोटी का प्रसाद बनाया।
शाम को सूर्य देव और छठी मैया की पूजा के बाद व्रतियों ने एकांत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद से ही व्रतियों का अगले 36 घंटों का अन्न और जल का पूर्ण त्याग यानी कठोर तप शुरू हो गया , जो सप्तमी के दिन पारण के बाद ही समाप्त होगा। खरना के बाद 24 मार्च को संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य) दिया जायेगा, जबकि आगामी 25 मार्च को उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य) और व्रत का पारण के साथ ही इस महापर्व का अनुष्ठान पूर्ण होगा।
मन और तन की शुद्धता का प्रतीक है खरना का अनुष्ठान-संत मौनी बाबा
बिहार ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सोनपुर स्थित लोकसेवा आश्रम, सूर्य मंदिर एवं शनि मंदिर के महंत संत विष्णुदास उदासीन उर्फ मौनी बाबा ने महापर्व छठ व्रत एवं खरना को मन और तन की शुद्धता का प्रतीक बताते हुए कहा कि सूर्य मंदिर परिसर में छठ व्रत के अवसर पर दूर दराज से व्रती छठ व्रत करने आते हैं। आश्रम द्वारा उन्हें हर प्रकार से सहयोग किया जा रहा है। कहा कि इस बार भी बिहार के अनेक व्रती और उनका परिवार यहां रहकर व्रत का अनुष्ठान पूरा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शाम के समय मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी का उपयोग कर गुड़ की खीर, शुद्ध घी लगी हुई रोटी बनाई गई और व्रतियों ने पारन किया।
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