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झारखंड की लोककला को राष्ट्रीय मंच पर मिली नई पहचान

तीन कलाकार संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड की समृद्ध लोककला, संस्कृति एवं पारंपरिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के बुंडू की बूटन देवी एवं सोमारी देवी को लोक नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए तथा सरायकेला के गुरु सुशांत कुमार महापात्र को छऊ मुखौटा शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों तीनों कलाकारों को मिला यह सम्मान झारखंड की कला, संस्कृति और परंपरा के लिए गौरव का विषय है। कलाकारों की इस उपलब्धि पर गोमिया के पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो एवं जिला परिषद उपाध्यक्ष बबीता कुमारी ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।

झारखंड की संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिलना गौरव की बात-डॉ लंबोदर महतो

गोमिया के पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो ने कहा कि झारखंड की धरती कला, संस्कृति और परंपराओं की दृष्टि से बेहद समृद्ध रही है। यहां की लोककला और लोक कलाकारों ने अपनी प्रतिभा एवं साधना से देश-दुनिया में अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि बुंडू की बूटन देवी एवं सोमारी देवी तथा सरायकेला के गुरु सुशांत कुमार महापात्र को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलना पूरे झारखंड के लिए गौरव का क्षण है।

 

कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों सम्मान प्राप्त करना इस उपलब्धि को और विशेष बनाता है।
डॉ महतो ने कहा कि इन कलाकारों ने अपनी कला और साधना के माध्यम से झारखंड की पहचान को देश के मंच पर मजबूत किया है। यह सम्मान केवल तीन कलाकारों का नहीं, बल्कि झारखंड की समृद्ध लोक परंपरा, संस्कृति और कला विरासत का सम्मान है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवा कलाकारों को भी अपनी पारंपरिक कला से जुड़कर उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा लेनी चाहिए।

कलाकारों का सम्मान झारखंड की संस्कृति का सम्मान-बबीता कुमारी

जिला परिषद उपाध्यक्ष बबीता कुमारी ने कहा कि झारखंड की लोककला और संस्कृति हमारी पहचान और हमारी जड़ों से जुड़ी है। बूटन देवी, सोमारी देवी एवं गुरु सुशांत कुमार महापात्र ने अपनी कला के माध्यम से राज्य की गौरवशाली परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के हाथों झारखंड के कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलना हम सभी के लिए गर्व और खुशी का विषय है। ऐसे सम्मान से न केवल कलाकारों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी लोककला एवं संस्कृति को संरक्षित करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि झारखंड की पारंपरिक लोकनृत्य, छऊ कला, हस्तशिल्प और लोक संस्कृति को संरक्षण एवं प्रोत्साहन देने की जरूरत है, ताकि हमारी समृद्ध विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके।

उपरोक्त जनप्रतिनिधियों ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले तीनों कलाकारों को बधाई एवं शुभकामना देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कहा कि झारखंड की पहचान को देश के मंच पर सम्मान दिलाने वाले इन कलाकारों को नमन है।

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