अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर 29 जुलाई को सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में गुरु पूर्णिमा महामहोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और पारंपरिक विधि-विधान के साथ आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत नारायणी महामहोत्सव के साथ की गयी। इस अवसर पर सवा सौ शालिग्राम शिलाओं का पंचामृत, फलों के रस और विभिन्न औषधियों द्वारा महाभिषेक किया गया, इसके उपरांत भव्य महाआरती की गयी। तत्पश्चात, श्रीत्रिदण्डी स्वामीजी महाराज के श्रीविग्रह का अभिषेक कर उन्हें नवीन काषाय वस्त्र धारण कराए गए और षोडशोपचार पूजन किया गया।
इस अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का महापर्व सभी संप्रदायों के लिए श्रद्धा का केंद्र है। कहा कि शास्त्र सम्मत गुरु वही है जो वेदों का ज्ञाता, वैष्णव, विष्णु भक्त और विमत्सर (ईर्ष्या-द्वेष से मुक्त) हो। बिना गुरु के मोक्ष संभव नहीं है। कार्यक्रम के दौरान लगभग 25 श्रद्धालुओं ने देवस्थानम में गुरु दीक्षा ग्रहण की।
इस अवसर पर बिहार कि मुजफ्फरपुर, पटना, दरभंगा, छपरा और उत्तर प्रदेश के बलिया सहित आसपास के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। देर रात्रि तक आयोजित भंडारे में भक्तों की भारी भीड़ जुटी रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में दिलीप झा, भोला सिंह, रतन कुमार कर्ण, अमरजीत राय, नंद किशोर तिवारी, आशा पाठक, राजा पाठक, धनंजय सिंह, दिवाने गोविंद समेत बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों और स्थानीय भक्तों का सराहनीय योगदान रहा।
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