राज्यपाल के नाम सौंपा 12 सूत्री मांग पत्र, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा
राजेश कुमार/बोकारो थर्मल (बोकारो)। विस्थापित एवं स्थानीय समन्वय संघर्ष समिति केन्द्रीय कमिटि की ओर से डीवीसी में व्याप्त विस्थापित समस्याओं के समाधान को लेकर झारखंड की राजधानी रांची स्थित लोक भवन के समक्ष आगामी 30 मार्च को विशाल जुलूस प्रदर्शन एवं जरूरत पड़ने पर अनिश्चित काल के लिए भूख हड़ताल कार्यक्रम करने का निर्णय लिया गया है।
साथ ही मांगो से संबंधित मांग पत्र लोक भवन स्थित राज्यपाल कार्यालय को सौंपा गया है। इसकी जानकारी विस्थापित एवं स्थानीय समन्वय संघर्ष समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष दिनेश्वर मण्डल ने 17 मार्च को। समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष मंडल ने कहा कि दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) प्रबंधन अपने स्वार्थ के लिए विस्थापितों की नियोजन नीति एकतरफा बनाकर विस्थापित समस्याओं को वषों से लटका कर रखा है। लम्बित समस्या को हल करने के बजाय झूठा आश्वासन देकर विस्थापितों को ठगने का कार्य वर्षों से कर रही है। कहा कि डीवीसी के बोकारो थर्मल सहित मैथन, पंचैत, चन्द्रपुरा, तिलैया एवं कौनार डैम जैसे जगहो पर डीवीसी रैयतो की जमीन अधिग्रहण की है। जमीन के बदले कई विस्थापित रैयतों को न नियोजन दिया गया है और न ही मुआवजा। नियोजन की मांग करने वाले रैयत विस्थापित आंदोलनकारियों को झूठे केस में फंसा कर कई तरह से प्रताड़ित कर जेल भेजा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि डीवीसी को जमीन देने वाले रैयत अब एकता बद्ध होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है। क्योंकि हजारो विस्थापित वर्तमान में दयनीय स्थिति में है और विस्थापित परिवार के नई पीढ़ी आज सडकों पर भीख माँगने, कोयला चोरी करने को विवश है। जिसका जिम्मेवार डीवीसी प्रबंधन है। इसलिए आंगन 30 मार्च को राजधानी रांची स्थित लोक भवन के समक्ष एकता बद्ध होकर तमाम विस्थापित अपने परिवार के साथ विक्षोम प्रदर्शन करेंगे। जिसमें विस्थापितों की मुख्य मांग है कि जिन विस्थापितों की जमीन डीवीसी ने ली है, उनके परिवारों को 50 हजार रूपये प्रतिमाह दिया जाए। डीवीसी मुख्यालय को झारखंड में लाया जाए।
डीवीसी के तमाम प्रतिष्ठानों में प्रभावित क्षेत्र के लिए पानी, बिजली एवं सिंचाई का साधन मुफ्त किया जाए। तमाम विस्थापितों को जिन्हें नौकरी नहीं मिला है उस परिवार को 50 लाख रूपया एक मुस्त मुआवजा दिया जाए। डीवीसी के तमाम विस्थापितों को रिक्त पदों में योग्यतानुसार नौकरी दिया जाए। डीवीसी सी.एस.आर. कर्मियों को अनुबंध के आधार पर महंगाई के अनुसार मानदेय दिया जाय। सामाजिक एकीकरण कार्यक्रम के कार्य में विस्थापित गाँव को विशेष प्राथमिकता दिया जाय। डीवीसी द्वारा विस्थापितों को दिया गया जमीन पर मालिकाना हक दिया जाए। बोकारो थर्मल में 85 विस्थापितों को नौकरी दिया जाए अन्यथा 50 लाख रूपये दिया जाए आदि विस्थापित समस्याओं से संबंधित 12 सूत्री मांगे शामिल हैं।
मंडल ने कहा कि आंदोलन को सफल बनाने को लेकर दामोदर घाटी के विस्थापितों एवं स्थानीय परिवारों की एक संयुक्त मोर्चा कमिटी का गठन किया गया है, जिसमें विस्थापित संघ कोनार डैम, भुमिहाश बेरोजगार संघर्ष समिति तिलैया डैम, विस्थापित एवं स्थानीय संघर्ष मोर्चा चंद्रपुरा एवं बोकारो थर्मल, वास्तुहास संग्राम संघ मैथन डैम एवं पंचेत डैम, दामोदर वैली वास्तुहारा मजदूर संग्राम समिति जामतारा, दामोदर वेली क्षतिग्रस्त कृषक समिति आरटीपीएस आदि विस्थापित समितियां इस आंदोलन में भाग लेंगे। इस अवसर पर विस्थापित नेता कैलाश करमाली सहित अन्य उपस्थित थे।
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