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विकास या विस्थापन गुवा में उबाल, 500 परिवारों के अस्तित्व की जंग तेज

जबरन विस्थापन किया गया तो होगा बड़ा आंदोलन-सांसद

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिमी सिंहभूम जिला का लौह नगरी गुवा इन दिनों विकास बनाम विस्थापन की जंग का केंद्र बन चुकी है। गुवा सेल प्रबंधन जहां अपने विस्तार और परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में जुटा है, वहीं सदियों से बसे सैकड़ों परिवार अपने अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। लगभग 500 परिवारों पर विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है।

इसी गंभीर स्थिति को समझने के लिए चाईबासा सांसद जोबा मांझी और जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन 10 अप्रैल को गुवा पहुंचीं। विस्थापितों ने उनका स्वागत किया, लेकिन इसके पीछे गुस्सा, दर्द और न्याय की पुकार साफ नजर आई।
बताया जाता है कि रामनगर, ढीपा साईं, नानक नगर, पुट साइडिंग, जाटा हाटिंग और डीवीसी जैसे इलाकों में रहिवासी भय और असुरक्षा में जी रहे हैं। स्थानीय रहिवासियों के अनुसार, सेल ने अब तक केवल 184 घर बनाए हैं, जबकि प्रभावित परिवारों की संख्या लगभग 500 है। यानी 300 से अधिक परिवारों का भविष्य अधर में है।

गुवा के विस्थापितों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2016 और 2018 के सर्वे का पूरा रिकॉर्ड गायब कर दिया गया है। इन सर्वे में घरों की सूची, तस्वीरें और परिवारों का पूरा डाटा शामिल था। अब इनका न होना क्षेत्र के विस्थापित रहिवासियों के बीच गहरी आशंका पैदा कर रहा है।

आदेश के बावजूद तोड़फोड़ की तैयारी :-

ज्ञात हो कि पुर्व में हीं प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि केवल उन्हीं घरों को तोड़ा जाए, जिन्हें नया आवास मिल चुका है। बावजूद इसके अधूरी सूची के बीच सेल प्रबंधन द्वारा तोड़फोड़ की तैयारी ने रहिवासियों में आक्रोश भर दिया है।
ज्ञात हो कि बीते माह 28 मार्च को सेल प्रबंधन ढीपा साईं में घर तोड़ने पहुंचा, लेकिन सैकड़ों रहिवासी एकजुट हो गए। महिलाओं और बच्चों ने भी मोर्चा संभाला और जोरदार विरोध के चलते कार्रवाई रोकनी पड़ी। यह विरोध नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन गया। विस्थापितों का आरोप है कि एक परिवार को सिर्फ एक कमरा दिया जा रहा है, जबकि एक घर में कई सदस्य रहते हैं। पानी, बिजली जैसी मूल सुविधाएं नहीं है। बिजली के लिए 500 रुपये जमा करने की शर्त उन्हें परेशान कर रहा है।

प्रभावित क्षेत्र के रहिवासियों का कहना है कि इससे बेहतर तो सरकारी आवास योजना है। विस्थापितों ने स्पष्ट मांग रखी है, जिसमें एक कमरा + एक हाल + एक किचन, शौचालय और बाथरूम, स्कूल बस की सुविधा, सामुदायिक भवन और धार्मिक स्थल, बिजली, पानी और साफ-सफाई दोबारा ग्राम सभा कर सभी प्रस्ताव पारित किए जाएं। कहना है हम कंपनी के खिलाफ नहीं, अन्याय के खिलाफ हैं। सांसद जोबा मांझी ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जबरन विस्थापन किया गया तो बड़ा आंदोलन होगा। सम्मानजनक समझौता नहीं हुआ तो खदान से लौह अयस्क बाहर नहीं जाएगा।

सोनाराम देवगम ने कहा कि शोषण बर्दाश्त नहीं होगा। लक्ष्मी सुरेन ने सवाल उठाया, कहा कि पहले बसाया, अब उजाड़ क्यों। राहुल आदित्य ने कहा कि जिन्होंने कंपनी को खड़ा किया, उन्हीं को हटाया जा रहा है। इस आंदोलन में क्षेत्र के सैकड़ों रहिवासी शामिल हुए, जिनमें अभिषेक सिंकु, बुधराम लागुरी, दुर्गा देवगम, चांदमनी लागुरी, मोहम्मद तबारक, लागुड़ा देवगम, देवकी कुमारी, रोहित सिंह, विनय प्रसाद, भादो टोप्पो, धर्मु रजक और बामिया माझी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

 

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