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आस्था, रोमांच व् रहस्य का संगम दुर्गापुर पहाड़ को पर्यटन स्थल बनाने की उठी मांग

सरकार की अनदेखी से ग्रामीण रहिवासियों में नाराजगी

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के दुर्गापुर पंचायत स्थित दुर्गापुर पहाड़ इन दिनों आस्था, परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत केंद्र बना है। यहां विराजमान बाबा बढ़राव के प्रति रहिवासियों की गहरी श्रद्धा है।

ज्ञात हो कि, प्रतिदिन दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं रखते हैं। स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत यहां पूरी होती है। मन्नत पूर्ण होने पर श्रद्धालु सफेद बकरा या सफेद मुर्गा की बलि चढ़ाकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।

दुर्गापुर पहाड़ धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता और रोमांच का भी प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालू पहाड़ पर चढ़ने का आनंद लेते हैं और ऊंचाई से आसपास के मनमोहक दृश्यों का लुत्फ उठाते हैं। पहाड़ के समीप स्थित एक प्राचीन तालाब भी पर्यटको के बीच आकर्षण का केंद्र है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस तालाब में कभी रानी स्नान करती थीं, जिसके कारण आज भी स्थानीय रहिवासी इसमें स्नान नहीं करते और इसे श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं।

इस क्षेत्र की एक और अनोखी परंपरा यह है कि दुर्गापुर पहाड़ के आसपास के कई गांवों में होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पहले बाहरी तत्वों द्वारा यहां होली खेलने के बाद नकारात्मक परिणाम सामने आए थे, जिसके बाद से यह परंपरा आज तक कायम है।
इधर, दुर्गापुर पंचायत के मुखिया अमरेश कुमार महतो ने राज्य सरकार से इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्थान धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

मुखिया ने बताया कि सरकारी उपेक्षा के बावजूद पंचायत स्तर पर सीमित संसाधनों से पहाड़ और आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस दिशा में ध्यान दे, तो दुर्गापुर पहाड़ क्षेत्र के विकास के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं।

क्षेत्र के ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का भी मानना है कि दुर्गापुर पहाड़ को पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने से यह क्षेत्र न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश में एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में पहचान बना सकता है। फिलहाल, यह स्थल अपनी आस्था, परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण पर्यटको को लगातार अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

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