प्रहरी संवाददाता/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ मंदिर के पूर्व महंत ब्रह्मलीन अवध किशोर गिरि का जीवन सेवा और विद्वता का संगम था, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
उक्त बातें जिला के हद में सोनपुर स्थित हरिहरनाथ मंदिर के यात्री निवास में मंदिर के महंत स्व.गिरि की पुण्यतिथि पर 8 अप्रैल को आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कही।
इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने पुर्व महंथ के तैल चित्र और मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मंदिर न्यास समिति के सचिव विजय कुमार सिंह ‘लल्ला’ ने कहा कि ब्रह्मलीन महंतजी का व्यक्तित्व अत्यंत सरल और मृदुभाषी था। उन्होंने बताया कि महंतजी मूलतः दक्षिण भारत के रहिवासी थे और कई भाषाओं के प्रकांड विद्वान थे। वे वर्ष 1968 में गया से सोनपुर आए और मंदिर को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनकी विद्वता और मृदु स्वभाव के कारण सोनपुर सहित समस्त क्षेत्रों में उनका गहरा सम्मान था। कहा कि बाबा हरिहरनाथ मंदिर के विकास में उनका अतुलनीय सहयोग रहा।

न्यास समिति के कोषाध्यक्ष निर्भय कुमार सिंह ने महंतजी को याद करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर ही न्यास समिति मंदिर के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पित है। उन्होंने उनके बताए सिद्धांतों पर चलने को ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान उप कोषाध्यक्ष मिथिलेश कुमार सिन्हा सहित मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशील शास्त्री, पवन शास्त्री, सदानंद पांडेय और गजेन्द्र पांडेय ने भी अपने विचार रखे। इनके अलावा अवधेश द्विवेदी, चन्द्रभूषण तिवारी, कृष्णा प्रसाद, ब्रजेश सिंह, विनय झा ने भी महंत स्व. गिरि की मंदिर उत्थान में भूमिका को याद किया। वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वनाथ सिंह सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे। वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि महंत अवध किशोर गिरिजी का जीवन सेवा और विद्वता का संगम था, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
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