अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सुदूर क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। सौ दिवसीय विशेष अभियान के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) युक्त अल्ट्रा पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के जरिए गांव-गांव में मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है। इसे हाई-रिस्क गांवों पर फोकस किया गया है।
जानकारी के अनुसार जिले के 437 गांवों को हाई-रिस्क श्रेणी में रखकर वहां सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। एआई तकनीक की खूबी यह है कि जिले में वर्तमान में दो पोर्टेबल मशीनें कार्यरत हैं। ये हल्की और बैटरी चालित हैं, जिससे बिजली की कमी वाले इलाकों में भी जांच आसान हो गई है। यह तकनीक बिना रेडियोलॉजिस्ट के कुछ ही सेकंड में संक्रमण की पहचान कर लेती है। बताया जाता है कि 80 वर्ष से अधिक के बुजुर्ग, पूर्व टीबी मरीज, कुपोषित और मधुमेह रोगियों की स्क्रीनिंग को प्राथमिकता दी जा रही है।
सारण के सिविल सर्जन डॉ राजकुमार चौधरी के अनुसार, सक्रिय मरीज खोज, 90 प्रतिशत उपचार सफलता दर और शत-प्रतिशत पोषण सहायता जैसे छह मानकों के आधार पर पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जाएगा। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से गांवों में मुफ्त दवा और सैंपल कलेक्शन की सुविधा दी जा रही है। आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय मुखियाओं के सहयोग से ग्रामीण अब खुलकर जांच के लिए आगे आ रहे हैं।
जिला के हद में रिवीलगंज प्रखंड के एक गांव में लगे कैंप में पहुंचे 65 वर्षीय रामजी महतो बताते हैं कि पहले खांसी को हम सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते थे। लेकिन जब गांव में ही जांच की सुविधा मिली, तो हमने जांच कराई। अब समय पर इलाज शुरू हो गया है, जिससे राहत मिल रही है। मकेर प्रखंड के कैतुका नंदन पंचायत के मुखिया मिथिलेश कुमार राय कहते हैं कि सरकार की यह पहल गांव के लिए वरदान साबित हो रही है। आशा कार्यकर्ता मधु देवी बताती हैं कि हम रोज गांव में घूम-घूमकर रहिवासियों को समझाते हैं। अब एआई मशीन से तुरंत रिपोर्ट मिल जाती है, जिससे आमजनों का भरोसा बढ़ा है।
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