ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। झारखंड स्टेट बार काउंसिल (Jharkhand State Bar Council) के निर्देशानुसार तेनुघाट अधिवक्ता संघ के सदस्यों ने न्यायिक कार्यों में हिस्सा नहीं लिया। बताते चलें कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण से अधिवक्ता भी बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे हैं। अधिवक्ता के साथ उनके सहायक कर्मी भी प्रभावित हो रहे हैं। इलाज की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर कोरोनावायरस की संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए सर्वसम्मति से विचार विमर्श के बाद सोमवार से अधिवक्ताओं को न्यायिक कार्यो में हिस्सा नहीं लेने का निर्णय लिया। निर्णय के अनुसार सोमवार 19 अप्रैल से 1 सप्ताह तक राज्य भर के अधिवक्ता अपने आप को न्यायिक कार्यों से अलग रखेंगे, न्यायालय में ना तो फिजिकल और न तो ऑनलाइन ही। साथ ही अधिवक्ता लिपिक भी न्यायालय के समक्ष किसी तरह का फाइलिंग नहीं करेंगे। 25 अप्रैल के बाद काउंसिल की बैठक के बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी और निर्णय लिया जाएगा। उक्त बातें तेनुघाट अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कुमार अनंत मोहन सिन्हा (Director Akshay Kumar Anant Mohan Sinha) महासचिव वकील प्रसाद महतो ने बताई। आगे दोनों ने बताया कि तेनुघाट अधिवक्ता संघ के सदस्य एवं उनके सभी लिपिक ने झारखंड स्टेट बार काउंसिल के निर्णय को पूरी तरह मानते हुए अपने आप को न्यायिक कार्यों से अलग रखा। उन्होंने सभी अधिवक्ता से बार काउंसिल के निर्णय को मानने की अपील की। स्टेट बार काउंसिल ने 19 अप्रैल से 25 अप्रैल तक ना तो वर्चुअल न फिजिकल किसी भी प्रकार का न्यायिक कार्य नहीं करने की अपील अधिवक्ताओं से की है। आगे बताया कि हमारे अनुमंडल के साथ ही पूरे देश में कोरोना संक्रमण से स्थिति खराब है। ऐसे में कोर्ट बंद करना आवश्यक था। सात दिनों के बाद सुधार की संभावना है।
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