सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकु ने 17 अगस्त को वैतरणी नदी तट पर स्थित रामतीर्थ (रामेश्वर धाम) में अपने विधानसभा क्षेत्र एवं झारखंड वासियों की सुख समृद्धि हेतु पूजा अर्चना की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य के पश्चिम सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर अनुमण्डल में बैतरणी नदी तट पर शानदार रामतीर्थ रामेश्वर मंदिर अद्भुत एवं अलौकिक मंदिर है। कहा कि इस मंदिर के बारे में कई रोचक किस्से मशहूर हैं। यहां भगवान राम के पैरों के निशान मौजूद हैं। इन पैरों का दर्शन कर श्रद्धालू धन्य हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इलाके में ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ जब 14 वर्षों के वनवास पर थे, तब यहां भी पहुंचे थे। तीनों ने बैतरणी नदी के इस तट पर आराम किया था। इसके बाद भगवान राम ने खुद अपने हाथाें से यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। भगवान राम ने इस शिवलिंग की पूजा की थी। कुछ दिनों तक यहां विश्राम करने के बाद भगवान राम नदी पार कर आगे की यात्रा पर निकल गए थे।
बताया जाता है कि झारखंड के पूर्व गर्वनर सैयद सिब्ते रजी ने भी उक्त मंदिर को उड़ीसा राज्य के चंपुआ से जोड़ने वाली पुलिया के निमार्ण में अग्रणी योगदान निभाई थी। क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा कहा जाता है कि भगवान श्रीराम यहाँ से जाते समय अपना खड़ाऊं और पदचिह्र यहां छोड़ गए थे। बहुत दिनों बाद पास के देव गांव के एक देवरी को स्वप्न आया। तब इस स्थान के बारे में पता चला। इसके बाद स्थानीय रहिवासियों ने यहां मंदिर का स्वरूप दे दिया।
ग्रामीण बताते हैं कि यहां मंदिर का निर्माण वर्ष 1910 में कराया गया। यह मंदिर पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड में रामतीर्थ के नाम से मशहूर व चर्चित है। अब यहां चार मंदिर मौजूद हैं। इनमें रामेश्वर शिव मंदिर, सीताराम मंदिर, भगवान जगन्नाथ मंदिर और बजरंग बली मंदिर शामिल हैं। सभी मंदिर देखने में काफी आकर्षक हैं। यहां का प्राकृतिक वातावरण मन को काफी आनन्द व शांति देता है। यहां हर वर्ष मकर संक्रांति पर बहुत बड़ा मेला लगता है। दूर -दूर से यहां श्रद्धालू नदी में स्नान करने आते हैं। सुबह से ही स्नान कर पूजा करने का सिलसिला शुरू हो जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि यहां झारखंड के अलावा ओडिशा के मयूरभंज और सुदंरगढ़ से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालूजन आते हैं। भगवान श्रीराम के पदचिह्रों का दर्शन कर खुद को धन्य महसूस करते हैं।
बताया जाता है कि उक्त मंदिर के पास में ही एक छोटा-सा गांव है देव गांव। यहां के ग्रामीणों ने इस मंदिर की देखभाल के लिए कमेटी बना रखी है। कमेटी ने ही मंदिर को विशाल और सुंदर स्वरूप दिया है। प्रत्येक सोमवार को यहां पूजा अर्चना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि यहां पूजा अर्चना करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अन्य मंदिरों की तुलना में रामतीर्थ मंदिर की अलग पहचान है। सावन, महाशिवरात्रि और मकर मेला, कार्तिक पूर्णिमा पर यहां मंदिर कमेटी की ओर से विशेष व्यवस्था की जाती है। मंदिर भव्य तरीके से सजाए जाते हैं।
बहरहाल उक्त मंदिर झारखंड राज्य में चर्चित होता जा रहा है । भगवान राम भक्तो का आवागमन एवं श्रद्धा का केंद्र के कारण काफी लोकप्रिय हो रहा है। यहाँ की वैतरणी नदी पर ध्यान दिया जाय तो इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को नकारा नही जा सकता है। वैतरणी नदी इस क्षेत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। स्थानीय रहिवासियों के लिए व्यवसायिक केन्द्र के रूप में यह शुभ संकेत दे रहा है।
विधायक सह उप मुख्य सचेतक (सत्तारूढ़ दल) सोनाराम सिंकु के साथ मौके पर मंदिर कमिटी के उपाध्यक्ष प्रभात प्रधान एवं समिति के कई सदस्यगण उपस्थित थे।
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