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उपायुक्त ने की डीसीसी एवं डीएलआरसी की त्रैमासिक बैठक

छोटे उद्यमियों, किसानों, छात्रों व् एसएचजी को ऋण उपलब्ध कराने का निर्देश

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला मुख्यालय समाहरणालय स्थित सभागार में 17 अगस्त को जिला उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में जिला परामर्शदात्री समिति (डीसीसी) एवं जिला स्तरीय समीक्षा समिति (डीएलआरसी) की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न बैंकों की प्रगति, ऋण वितरण, कृषि ऋण, शिक्षा ऋण, स्वयं सहायता समूहों के वित्त पोषण, पीएमईजीपी, पीएमएफएमई एवं किसान क्रेडिट कार्ड योजनाओं की समीक्षा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त झा ने कहा कि छोटे उद्यमियों की सबसे बड़ी समस्या कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) एवं ऋण की उपलब्धता है। कहा कि बड़े ऋण मामलों में समाधान अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं एवं गरीब व्यवसायियों तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है। इस स्थिति को बदलने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि बैंक केवल एक भवन के भीतर संचालित होने वाली संस्था नहीं है, बल्कि उसका वास्तविक कार्यक्षेत्र बाजार और समाज है। कहा कि बैंक के लिए बड़े व्यवसायी और छोटा सब्जी विक्रेता दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए वित्तीय सेवाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। उपायुक्त ने कहा कि बैंकों को अपने दायरे को बंद कमरों से बाहर निकालकर समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचना होगा। कहा कि स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), छोटे कारोबारियों एवं जरूरतमंद को ऋण एवं अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।

तभी वित्तीय समावेशन का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा। बैठक में एलडीएम ने कहा कि बोकारो जिले के क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो में पिछली बैठक की तुलना में सुधार दर्ज किया गया है। राज्य स्तरीय रैंकिंग में बोकारो शीर्ष पांच जिलों में शामिल है। कहा कि वर्तमान में जिले का सीडी रेशियो 60.28 प्रतिशत है। उपायुक्त ने सभी बैंकों को और बेहतर करने की दिशा में कार्य करने पर बल दिया।

बैठक में उन्होंने कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देने, किसानों को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराने तथा फार्म क्रेडिट के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कृषि विभाग, जेएसएलपीएस, एलडीएम एवं संबंधित बैंकों को माह के अंत तक एक विशेष कार्यशाला आयोजित करने को कहा। उन्होंने शिक्षा ऋण के मामलों में जिले के प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर जोर देते हुए पात्र विद्यार्थियों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया। साथ ही सभी बैंकों को निर्धारित लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा करने को कहा। उन्होंने कृषि अवसंरचना (एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर) से संबंधित परियोजनाओं के लिए ऋण वितरण बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया।

बैठक में पीएमईजीपी, पीएमएफएमई, स्वयं सहायता समूहों की प्रगति, किसान क्रेडिट कार्ड एवं अन्य वित्तीय योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने प्राथमिक सेक्टर की प्रगति की समीक्षा साप्ताहिक स्तर पर सुनिश्चित करने को एलडीएम को निर्देश दिया। बैठक को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शताब्दी मजूमदार ने कहा कि जिले में वित्तीय समावेशन एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत अधिकाधिक पात्र लाभुकों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बैंक एवं जिला प्रशासन को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।

उन्होंने बैंक अधिकारियों से लंबित आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने तथा ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक सरल एवं लाभुक हितैषी बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार, शिक्षा ऋण, कृषि एवं एमएसएमई क्षेत्र में ऋण प्रवाह बढ़ाने से न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी, बल्कि रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

डीडीसी ने कहा कि विभिन्न योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नियमित अनुश्रवण, बेहतर समन्वय एवं सकारात्मक कार्यशैली आवश्यक है। उन्होंने बैंक अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा जिला प्रशासन के साथ मिलकर बेहतर परिणाम सुनिश्चित करें।मौके पर प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन, अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) प्रकाश चन्द्र मिश्रा, नाबार्ड डीडीएम सुरीना राजन एवं भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि एस. एस. तिर्की सहित विभिन्न बैंकों के समन्वयक एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

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