एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची के आंदोलनकारी छात्रों को आरएसएस और हिंदुत्व समूहों से जोड़कर प्रस्तुत करना छात्र आंदोलन की वास्तविक मांगों और संघर्ष को कमजोर करने वाला है। एआईएसएफ छात्रों के संघर्ष और आंदोलन को किसी राजनीतिक या वैचारिक चश्मे से देखने की प्रवृत्ति की आलोचना करता है। उक्त बाते एआईएसएफ प्रदेश सह सचिव सह रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने 14 अगस्त को कही।
उन्होंने कहा कि एक अंग्रेजी ऑनलाइन अखबार द्वारा आंदोलनकारी छात्रों को आरएसएस और हिंदुत्व समूहों से जोड़कर प्रस्तुत करना छात्र आंदोलन की वास्तविक मांगों और संघर्ष को कमजोर करने वाला है। कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी सहित भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे छात्र अपने भविष्य के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। इस आंदोलन को किसी संगठन की छाया बताने के बजाय छात्रों की वास्तविक समस्याओं और उनकी मांगों पर तथ्यात्मक रिपोर्टिंग होनी चाहिए।
एहतेशाम ने कहा कि एआईएसएफ मीडिया से अपील करता है कि छात्र आंदोलनों की रिपोर्टिंग में तथ्यों, निष्पक्षता और छात्रों की आवाज़ को प्राथमिकता दी जाए। मीडिया निष्पक्षता के साथ छात्रों के संघर्ष को बदनाम करना बंद करे और आंदोलनरत छात्रों की आवाज़ को मजबूती से उठाये।
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