रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। पर्यावरण संरक्षण, वन संपदा की सुरक्षा तथा मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से वन बचाव समिति को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। समिति का विस्तार कर गांव-गांव में स्थानीय रहिवासियों को जोड़ा जाएगा, ताकि जंगलों में हो रही अवैध लकड़ी की कटाई, लकड़ी की तस्करी तथा पत्थरों के अवैध उत्खनन जैसी गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सके।
उक्त बातें वन बचाव समिति के केंद्रीय अध्यक्ष विष्णु चरण महतो ने 16 जुलाई को कही। उन्होंने कहा कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन, जैव विविधता और वन्य जीवों के संरक्षण का आधार हैं। कहा कि लगातार हो रही अवैध कटाई और खनन से जंगलों का क्षेत्र सिकुड़ रहा है, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यदि समय रहते इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर प्राकृतिक संकट का सामना करना पड़ेगा।
विष्णु ने कहा कि हाल के वर्षों में जंगलों के कम होने और प्राकृतिक आवास प्रभावित होने के कारण जंगली हाथियों का रिहायशी इलाकों की ओर आना बढ़ गया है। भोजन और पानी की तलाश में हाथियों के गांवों में प्रवेश करने से फसलों को नुकसान पहुंचता है और कई बार जनहानि की घटनाएं भी सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे, पर्याप्त भोजन और जल स्रोत उपलब्ध रहेंगे तो हाथियों का प्राकृतिक आवास भी सुरक्षित रहेगा और मानव–हाथी संघर्ष में कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि वन बचाव समिति स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जोड़कर जागरूकता अभियान चलाएगी। साथ ही वन विभाग और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर अवैध गतिविधियों की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी, ताकि दोषियों के विरुद्ध समय पर कार्रवाई हो सके। कहा कि समिति का उद्देश्य केवल अवैध कटाई रोकना ही नहीं, बल्कि अधिक से अधिक पौधारोपण, जंगलों की निगरानी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति आमजनों को जागरूक करना भी है।
उन्होंने कहा कि जंगलों के संरक्षण से पर्यावरण संतुलित रहेगा, भू-जल स्तर बेहतर होगा, वर्षा चक्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा तथा वन्यजीवों का अस्तित्व भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने आम जनों से अपील की कि यदि कहीं भी अवैध लकड़ी की कटाई, लकड़ी की तस्करी, पत्थरों का अवैध उत्खनन या जंगलों को नुकसान पहुंचाने वाली कोई गतिविधि दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग अथवा वन बचाव समिति को दें। महतो ने कहा कि जंगल बचेंगे तो पर्यावरण बचेगा, पर्यावरण बचेगा तो मानव जीवन सुरक्षित रहेगा। वन संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक रहिवासी का नैतिक दायित्व है। कहा कि जन सहभागिता से ही जंगलों को बचाया जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं समृद्ध प्राकृतिक धरोहर छोड़ी जा सकती है।
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