करोडों खर्च के बाद भी रहिवासी शृद्ध जल के लिए हो रहे वंचित
नंद कुमार सिंह/बेरमो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में बेरमो कोयलांचल की एक बड़ी आबादी अशुद्ध जल पीने को मजबूर हैं। इन्हें सीसीएल बीएंडके प्रक्षेत्र के करगली वाटर फिल्टर प्लांट से जलापूर्ति की जाती है, जिससे करीब एक लाख की आबादी की प्यास बुझती है।
बताया जाता है कि इसके वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में जमा गंदगी की सफाई नियमित रूप से नहीं होने की शिकायत मिलती रहती है। फिक्रमंद रहिवासियों का कहना है कि फिटकरी, ब्लीचिंग पाउडर एवं चूना के उपयोग में भी अनियमितता बरती जाती है। यही कारण है कि इस प्लांट से सप्लाई किए जा रहे जलके सेवन से क्षेत्र के रहिवासी अक्सर बीमार पड़ जाते हैं। करगली फिल्टर प्लांट की अव्यवस्थाओं का खामियाजा क्षेत्र मे रहने वाले रहिवासियों को भुगतान पर रहा है।
कहा जा रहा है सीसीएल प्रबंधन द्वारा जलापर्ति व्यवस्था पर हर माह एक करोड रुपए से अधिक खर्च होने के बावजूद यहां के रहिवासियों को न तो पर्याप्त पानी मिल रहा है और न ही परी तरह शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो पा रहा है। फिल्टर प्लांट में जलापूर्ति के लिए एक अधिकारी, पांच फोरमैन और 50 कर्मचारी कार्यरत हैं। विभिन्न क्षेत्रों में पानी पहुंचाने के लिए सात मोटर तथा दामोदर नदी से पानी उठाव के लिए आठ मोटर लगाए गए हैं। बावजूद इसके प्रतिदिन रहिवासियों को पानी नहीं मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार अक्सर प्लांट में फिटकरी और चुना (लाइम) उपलब्ध नहीं रहने की शिकायत मिलते रहती है।
इस फिल्टर प्लांट से प्रतिदिन लगभग 3 मिलियन पानी सप्लाई की जाती है। जिसमे क्षेत्र के बोकारो कोलियरी, करगली प्वाइंट, जीएम कॉलोनी बीएडंके, घुटियाटांड़, डबल स्टोरी करगली एवं डबल स्टोरी करगली पंप में पानी आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा सुभाषनगर, जवाहरनगर, करगली बाजार, तीन नंबर, रामनगर, बेरमो सीम, चलकरी कॉलोनी, संडेबाजार, कुरपनिया, गांधीनगर, चार नंबर, बेरमो स्टेशन, अंबेडकर कॉलोनी, ढोरी जीएम कालोनी, ढोरी स्टाफ क्वार्टर आदि कई जगहों पर जलापूर्ति होती है।
करगली फ़िल्टर प्लांट की क्षमता 3.2 मिलियन गैलन
ज्ञात हो कि वर्ष 1964 में निर्मित करगली फिल्टर प्लांट सीसीएल के बीएंडके प्रक्षेत्र का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट है, जिसकी पानी परिष्करण कर आपूर्ति करने की क्षमता 3.2 मिलियन गैलन प्रतिदिन है। तीन साल से अधूरा 3 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट करगली फिल्टर प्लांट में वाटर क्लैरिफायर और फिल्टर बेड की मरम्मत का कार्य रांची की मेकॉन कंपनी को लगभग तीन करोड रुपए की लागत से दिया गया था। आरोप है कि तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं किया जा सका। वर्तमान में केवल एक वाटर क्लैरिफायर और दो फिल्टर बेड के सहारे पूरे क्षेत्र में पेयजल आपर्ति की जा रही है।
आई डब्लू एसपी फिल्टर प्लांट के प्रभारी उत्कर्ष बक्शी ने अपने कार्यकाल के दौरान सकारात्मक सोच एवं कार्य के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट परिचय दिया। उनके प्रयासो से लंबे समय से बंद 12 नंबर पंप को चालू किया गया। उन्होने कुछ दिन पहले क्लैरिफायर टंकी की सफाई कराई थी। जिन पंप पार्ट की चोरी हुई उसे जनवरी माह में स्टोर से लाया गया था।
उसका बाकी पार्ट अगले माह डिलीवर होने वाला था। पूरा पंप बन जाने का बाद लगभग एक साल तक पानी के प्रेशर की समस्या समाप्त हो जाती, जिससे सीसीएल कॉलोनियों की पानी की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित हो जाती। फिल्टर प्रबंधन की सोच थी कि पानी समय पर और भरपूर मिले। घटना स्थल पर पुराने पेड़ की टहनी का इस्तेमाल किया गया है एवं दीवार में ईंट निकला है जिससे यह प्रतीत होता है की चोरो द्वारा रैकी करके इस घटना को अंजाम दिया गया है। अभी चहार दिवारी को उचाई कर बारबेड वायर, ब्लीचिंग उपलब्ध और झांडी सफाई की जरूरत है।
इस बावत विभाग के अधीक्षण अभियंता अमरेश प्रसाद ने 2 जुलाई को कहा कि फिल्टर प्लांट से प्रतिदिन औसतन 13 से 14 घंटे पानी की आपर्ति की जाती है। कहा कि सभी क्षेत्रों में पर्याप्त पानी पहुंच रहा है या नहीं, यह सिविल विभाग का विषय है। चूना, फिटकरी की उपलब्धता तथा मेकॉन कंपनी द्वारा लंबित कार्य भी सिविल विभाग के अधीन आते हैं। उन्होंने कहा कि सब कुछ प्रावधान के मुताबिक काम किया जाता है। कोशिश रहती है कि सभी को समुचित मात्रा में पानी उपलब्ध हो।
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