रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो की चार बहनों ने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बंजर जमीन पर आम की बागवानी कर मिसाल कायम की है।
जिला के हद में चास प्रखंड की चाकुलिया पंचायत के चिंतामी गांव की चार बहन नेहा, श्वेता, सीमा व अप्पू ने आम की बागवानी के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी हैं। उन्होंने झारखंड सरकार के बिरसा हरित ग्राम योजना का लाभ लेने के लिए पहले अपने अभिभावकों को प्रेरित किया। इसके बाद योजना का लाभ लेकर परिवार को आगे बढ़ाने में मदद की।
ज्ञात हो कि, चिंतामी गांव के अधिकांश किसान पारंपरिक खेती पर निर्भर हैं। वहीं इन बहनों ने बंजर जमीन को हरे-भरे आम के बाग में बदलकर क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। अप्पू ने 8 जून को भेंट में बताया कि वर्ष 2022 में उन्हें अखबार के माध्यम से झारखंड सरकार की बिरसा हरित ग्राम योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपने चाचा को योजना के बारे में बताया और प्रखंड कार्यालय से संपर्क कर इसका लाभ लिया।
कहा कि मनरेगा के तहत एक एकड़ बंजर भूमि पर 112 आम के पौधे उपलब्ध कराए गए, जिससे उनकी बागवानी यात्रा की शुरुआत हुई। आज वे पौधे धनवर्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही फूल व सब्जी की खेती भी करवा रही हैं। कहा कि एक वर्ष में एक एकड़ बंजर भूमि में आम, फूल व सब्जी के माध्यम से लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई है।
नेहा और श्वेता ने बताया कि चारों बहनों ने मिलकर पौधों की रोपाई से लेकर सिंचाई और देखभाल तक हर काम स्वयं की है। कहा कि पौधों को निर्धारित दूरी पर लगाया गया और नियमित रूप से उनकी निगरानी की गई। शुरुआती वर्षों में पौधों की बेहतर वृद्धि के लिए मंजर और फलों को हटा दिया गया। कहा कि शुरुआत में खराब मिट्टी, कुछ पौधों का सूख जाना और कम उत्पादन जैसी चुनौतियां भी सामने आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इस बावत उन्होंने कृषि विशेषज्ञों से सलाह ली और यूट्यूब सहित विभिन्न माध्यमों से आधुनिक बागवानी की जानकारी हासिल कर पौधों की देखभाल की।
चारो बहनों का लगातार प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि तीन वर्षों में पेड़ मजबूत हो गए और चौथे वर्ष में पहली बार अच्छी मात्रा में फल उत्पादन हुआ। हाल यह है कि बागिचा से ही खरीददार आम का फल लेकर जा रहे हैं। आज उनके बाग में आम की अच्छी पैदावार हो रही है और उन्हें इससे बेहतर आय भी प्राप्त हो रही है।
अप्पू और सीमा का कहना है कि परिवार के सहयोग और निरंतर मेहनत ने उनके सपने को साकार किया है। जबकि, नेहा का मानना है कि पढ़ाई के साथ-साथ खेती भी आय का मजबूत माध्यम बन सकती है और आधुनिक बागवानी से युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। चारों बहनें अब गांव के अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ बागवानी और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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