एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। कहानिका हिंदी पत्रिका झारखंड के इंटरनेशनल चैप्टर दुबई द्वारा बीते 6 जून की संध्या गूगल मिट पर वैश्विक पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विषय पर आभासी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आभासी कवि सम्मेलन में विश्व के कई देशों से हिंदी के कवियों, साहित्यकारों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने भाग लिया।
आभासी कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के बोकारो जिला कृषि प्रकोष्ठ प्रमुख अंजनी सिन्हा ने जैविक कृषि के बारे में अपने अनुभव साझा की और कहा कि आजकल हम जहरीले रासायनिक खादों और कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं जिससे फसलें और फल सब्जियां भी जहरीली होती जा रही है। कहा कि इसका प्रतिकूल प्रभाव मानव जीवन पर पड़ रहा है। मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी घटती जा रही है।
इसलिए हमें जैविक कृषि पर जोर देना चाहिए जिससे फल, सब्जियां और अनाज पौष्टिक और शुद्ध होंगे। महासचिव मकस सह प्रधान संपादक कहानिका सह सभा अध्यक्ष श्याम कुंवर भारती ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमारी ही गलतियों का नतीजा है कि आज विश्व स्तर पर बुरी तरह से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक संख्या में वृक्षारोपण करे, प्लास्टिक का उपयोग कम करे, नदियों, तालाबो और समुद्र में प्रदूषित कचड़ा न बहाये, बरसात में छत के पानी को जमा करें, कल कारखानों के चिमनियों के धुआँ को भी वायुमंडल में जाने से पहले शुद्ध करे।
भारती ने अपनी संस्था में कार्यक्रमों के बारे में बताया कि बीते माह मध्य प्रदेश के मैहर में भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था। कहा कि अगला आयोजन जुलाई माह में जम्मू कश्मीर में होने जा रहा है, जिसमें कवियों को बढ़ चढ़कर भाग लेना है। उन्होंने पेड कवि सम्मेलन के बारे में बताया कि आयोजकों द्वारा कवि सम्मेलन की बुकिंग होने पर कवियों को उचित मानदेय और यात्रा भत्ता आदि प्रदान किया जाएगा। कवि सम्मेलन में भाग लेने वाले कवियों की सभी रचनाओं को काव्य संकलन के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। कहा कि जिन विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किया है उसे आलेख के रूप में प्रकाशित किया जाएगा।
इस अवसर पर अंतराष्ट्रीय संयोजक दुबई जय कृष्ण मिश्रा ने भारती की लिखी भोजपुरी देवी पचरा गीत संकलन पुस्तक जगमहरिनिया ये माई का ऑनलाइन विमोचन किया। अंतर्राष्ट्रीय सह संपादक अबुधाबी सत्येंद्र नाथ गुप्ता ने पत्रिका की ई-मैगजीन संस्करण का ऑनलाइन विमोचन किया। मिश्रा ने ग्लोबल वार्मिंग विषय पर अपना काव्य पाठ किया और अपने विचार व्यक्त किया। गुप्ता ने जलवायु परिवर्तन विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए काव्य पाठ किया। काठमांडू नेपाल से डॉ दिली राम शर्मा ने वृक्षारोपण विषय पर काव्य पाठ और विचार व्यक्त किया। छत्तीसगढ़ से डॉ उमेश कुमार पांडेय ने जैविक विविधता पर विचार व्यक्त किया।
मंच संचालन सरगुजा छत्तीसगढ़ से आशा पांडेय और अंजू पांडेय ने किया। सरस्वती वंदना मांगीलाल मरमिट, गणेश वंदना डॉ दीप्ति खरे मंडला, देवी गीत श्याम कुंवर भारती, स्वागत गीत पूनम दुबे, स्वागत भाषण डॉ उमेश कुमार पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन श्याम कुंवर भारती ने किया। आभासी कवि सम्मेलन में डॉ दिवाकर पाठक, कल्पना झा, मधुमिता साहा, सीमा कुमार, मांगी लाल मर्मिट, डॉ अंजू पांडेय, पूनम दुबे, टी सी महतो, जगन्नाथ पांडेय, गायत्री पांडेय, जय कृष्ण मिश्रा, सत्येंद्र नाथ गुप्ता, कौसर भुट्टो, ऋचा गौतम, नीरू कालरा आदि ने बेहतरीन काव्य पाठ की प्रस्तुति से सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। उक्त जानकारी कहानिका हिंदी पत्रिका के केंद्रीय सूचना प्रभारी शिखा गोस्वामी नीहारिका ने 7 जून को दी।
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