बिहार ने सिखाया, मुख्यमंत्री से बड़ा होता है राज्यसभा का पद
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर के बागमली स्थित सूरजदेव मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में बीते 4 जून की रात्रि आयोजित जागरण के तहत भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक अनुष्ठान में हास्य-व्यंग्य के तीखे तीर चले, मखमली आवाजों से प्रेम की अविरल धारा बही और वीर रस के ओज से श्रोता राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर हो गए।
इस अवसर पर देश के नामचीन कवियों और शायरों की अनूठी युगलबंदी ने देर रात तक पंडाल में उपस्थित जनसैलाब को बांधे रखा और पूरा वातावरण रह-रहकर तालियों की गड़गड़ाहट और ठहाकों से गूंजता रहा। कवि सम्मेलन के सूत्रधार और हास्य-व्यंग्य के सुप्रसिद्ध कवि तेज नारायण शर्मा ‘बेचैन’ ने मंच संचालन और अपने धारदार काव्य पाठ से ऐसा समां बांधा कि श्रोता लोटपोट हो गए।
मंच संभालते ही उन्होंने अपनी विद्रोही शैली में बिहार की समसामयिक राजनीति पर गहरा तंज कसते हुए पढ़ा, कहा कि इसका सूरज डूब चुका, पश्चिम में अब लाली तक चली गई, रसना की रत्ना पर भाषा भी गाली तक चली गई और कुलवधू बनने गई जो वैभव के प्यार में, वो सीधे वैशाली तक चली गई।
बाहर से आए रचनाकारों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने बिहार के बौद्धिक स्तर की जमकर सराहना की और राजनीतिक उठापटक पर चुटकी लेते हुए कहा कि यह वह बिहार है जिसने देश को पहला राष्ट्रपति, बुद्ध को ज्ञान और विश्व को नालंदा दिया। और हां, यह वही बिहार है जिसने हाल ही में देश को यह भी सिखाया कि राज्यसभा का पद मुख्यमंत्री के पद से कितना बड़ा होता है। अपने गंजेपन पर स्वयं व्यंग्य कसते हुए उन्होंने कहा कि माना कि मेरी पैकिंग खराब है, पर अंदर का प्रोडक्ट एकदम शानदार है! और मुझे मालूम है कि बिहार वासी पैकिंग देखकर माल नहीं खरीदते। यही कारण है कि यहां एक अस्वस्थ भी स्वास्थ्य मंत्री बन जाता है।
जब देश के प्रख्यात शायर अजहर इकबाल ने मंच संभाला, तो उन्होंने मरुस्थलनुमा जीवन में प्रेम का रस घोल दिया। उनकी मखमली आवाज और दार्शनिक भावों ने श्रोताओं को आत्मविभोर कर दिया। उन्होंने संपूर्ण समर्पण को बयां करते हुए पढ़ा: तुम न देखो मुझे तो कौन देखेगा, जलती हुई सांसों की रवानी तेरे नाम… सफेदी मेरे बालों की, जीवन की ये सांझ सुहानी तेरे नाम… दूर तलक फैला है ये मरुस्थल मेरे लिए, वृक्ष, हवाएं और बहता पानी तेरे नाम।
अजहर ने केवल रूमानियत ही नहीं बिखेरी, बल्कि नारी शक्ति का आह्वान करते हुए ललकारा कहा कि हर तरफ घात में बैठे दुशासन, अब वीर अर्जुन नहीं आने वाला, खुद तुम्हें दुर्गा के अवतार में ढलना होगा। उन्होंने राम की विनम्रता और कृष्ण के प्रेम चरित्र की सुंदर व्याख्या की। अंत में उनके सूफियाना शेर मेरी हार पर एक शख्स मुस्कुरा बैठा, हम तो अपनी हार में भी उसकी जीत देखते हैं पर साहित्यानुरागियों ने खड़े होकर उन्हें दाद दी।
देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 1500 किलोमीटर की दूरी तय कर हाजीपुर पहुंचीं सुप्रसिद्ध कवयित्री पद्मिनी शर्मा ने कार्यक्रम का गरिमामयी शुभारंभ मधुर सरस्वती वंदना (वंदे शारदे सरस्वती… तू दयानी, तू ही भवानी) से की। वंदना के बाद उन्होंने बिहार की माटी के उभरते युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की अद्भुत उपलब्धि को सलाम करते हुए गाया: कमाल है, कमाल है, कमाल है, बड़े-बड़ों से भी बड़ा हमारा नौनिहाल है… गजब जुनून से भरा सपूत है, वो सूर्य है क्रिकेट के समस्तीपुर का लाल है।
इसके बाद उन्होंने पुरुषों और वैवाहिक जीवन पर करारे व चुटीले तंज कसे। मंच पर उपस्थित कवि विनोद पाल पर चुटकी लेते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि इतने प्यारे हैं, इन्हें घर ले जाकर बेटे को दिखाऊँगी कि ज्यादा समोसा खाओगे तो ऐसे हो जाओगे। उन्होंने हंसते हुए महिला शक्ति की वकालत की, जिसे सुनकर पंडाल में मौजूद जोड़ों ने खूब ठहाके लगाए।
प्रख्यात हास्य-व्यंग्य कवि सुदीप भोला ने अपनी बेबाक और धारदार शैली से राजनीतिक विसंगतियों पर जमकर प्रहार किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार के मंत्री संजय सिंह की ओर मुखातिब होते हुए उनकी खूबसूरती पर चुटकी ली और कहा कि आज के दौर में पार्षद बनना मुश्किल है, ऐसे में मंत्री पद तक का इनका संघर्ष वाकई बड़ा है।
उन्होंने अपने मशहूर व्यंग्य गीत नीतीश कुमार के पांच नंबर के माध्यम से बिहार की पलटी मार राजनीति पर करारा प्रहार किया। उन्होंने एक काल्पनिक वाकया सुनाया कि कैसे उनकी बेटी ने परीक्षा में नीतीश सरकार के सहयोगी के रूप में राजद पर सही का निशान लगाया, लेकिन कॉपियां जांचने तक सरकार भाजपा के साथ चली गई और उसके 5 नंबर कट गए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली की राजनीति और आप-भाजपा के द्वंद्व पर आधारित अपने बहुचर्चित गीत जब चड्ढा ही निकल गया… की पंक्तियाँ पढ़कर श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
विशिष्ट अतिथियों की रवानगी के कारण बिखर रहे माहौल को अयोध्या से पधारीं प्रख्यात कवयित्री पूजा मिश्रा “यक्ष” ने अपनी कोमल वाणी और गहरे जज्बातों से दोबारा बांध लिया। मंच संभालते ही उन्होंने अपने उपनाम पर बेहद खूबसूरत शेर पढ़ा: कहा कि नहीं अब पूछते हैं यक्ष कोई प्रश्न दुनिया से, सभी युधिष्ठिर हो गए।
उन्होंने आधुनिक समाज और मीडिया के चैनलों द्वारा परोसी जा रही सांस्कृतिक गंदगी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि इससे निपटने का एकमात्र सशक्त माध्यम हिंदी कविता ही है। जब उन्होंने अपनी मशहूर रचना गुनगुनाई भटकते दिलों की कहानी ना पूछो, कि दरिया से उसकी रवानी ना पूछो तो पूरा माहौल भावुक हो उठा। उन्होंने कार्यक्रम का समापन इस दिल छू लेने वाले शेर से किया: कि वक्त को बर्बाद हम करते नहीं, आइना नाशाद हम करते नहीं, ओढ़ लेते हैं तुम्हारी याद को, अब कोई फरियाद करते नहीं।”
दिल्ली के प्रख्यात हास्य कवि विनोद पाल ने अपनी बेबाक वाकपटुता से देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। उन्होंने हवाई अड्डे पर हुए स्वागत से अभिभूत होकर भोजपुरी सीखने और अपनी पूर्व प्रेमिका की शादी में लिपस्टिक गाना गाने के बाद हुई कुटाई का मजेदार संस्मरण सुनाया। उन्होंने करवा चौथ पर मंचासीन एक कवि की आधिकारिक आदत पर तंज कसा कि कैसे बात कहने पर उन्हें पत्नी के हाथों अस्पताल पहुंचना पड़ा।
सास-बहू के कटु रिश्तों पर प्रहार करते हुए उन्होंने हरिद्वार जा रही बस का उदाहरण दिया और व्यवस्था पर चोट करते हुए हाजीपुर पुलिस स्टेशन का एक तीखा काल्पनिक किस्सा सुनाया, कहा कि मुझे यहाँ 20 हजार के मानदेय पर बुलाया गया था, लेकिन जब पुलिसिया खाकी लिफाफा खुला, तो मुझे वहां से छूटने के लिए 4 लाख रुपये चुकाने पड़ गए। अंत में, उन्होंने लड़कों के जीवन के तीन पड़ावों को तीन गानों में पिरोते हुए और सिनेमाई किरदारों (ऋषि कपूर, फिल्म धड़कन और बाहुबली) के संवादों के अनूठे मिश्रण के साथ ‘नेहा’ के प्रति एक प्रेम-कविता का पाठ कर महफिल लूट ली।
देश के प्रख्यात वीर रस के कवि अशोक चारण ने अपनी ओजस्वी कविताओं से श्रोताओं में राष्ट्रवाद और शौर्य का ऐसा संचार किया कि दर्शकों का सीना चौड़ा हो गया। धर्म और सनातन की रक्षा का आह्वान करते हुए उन्होंने हुंकार भरी: कहा कि रामजी के मंदिर को देखने महादेव धरती फाड़ कर आ गए, गंगा की लहरों पर नाचते भोले भंडारी आ गए। जब-जब धर्म पे संकट आया, शिव ने त्रिशूल उठाया है…।
अशोक चारण ने देश में हो रहे पेपर लीक की घटनाओं पर गहरी वेदना व्यक्त करते हुए कहा, कि यह चोरी केवल किसी परीक्षा पत्र की नहीं, बल्कि अंधियारी रातों में जागकर पढ़ने वाले बच्चों के उजाले की और कर्ज में डूबे परिवारों के सपनों की चोरी है। उन्होंने मांग की कि ऐसे पेपर चोरों की सात पीढ़ियों को उम्रकैद मिलनी चाहिए। नेताओं के खोखले वादों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जनता की प्यास बुझाने के लिए नेताजी कागजों पर झील बना रहे हैं। अंत में उन्होंने बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम पर गुजराती ढोकले पर झालमुड़ी के रूपकों से गहरा व्यंग्य किया और कहा कि आज की बेटियों में फिर से झाँसी की रानी बोल रही है।
शब्दों के शिल्प, तीखे कटाक्षों और भावनाओं के इस अद्भुत संगम के साथ यह शाम हाजीपुर के सांस्कृतिक इतिहास में एक यादगार और ऐतिहासिक रात के रूप में दर्ज हो गई। मौके पर बिहार सरकार के मंत्री रमा निषाद, मंत्री संजय सिंह, वैशाली विधायक सिद्धार्थ पटेल, हाजीपुर विधायक अवधेश सिंह, नगर परिषद् हाजीपुर की सभापति डॉ संगीता कुमारी, नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष विजय कुमार लाला, एक दैनिक अखबार के ब्यूरो चीफ रविशंकर शुक्ला, सुधीर शुक्ला, मनीष शुक्ला, सतीश शुक्ला, सुशील वर्मा, चंद्रभूषण सिंह शशि, गंगेश गुंजन, हर्ष, सुनील सिंह, दिलीप सिंह सहित हजारों दर्शक मौजूद थे।
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