पुरुषोत्तम मास में सोनपुर में बहेगी श्रीमद्भागवत की रसधारा, संतों का आगमन शुरू
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। परम पवित्र पुरुषोत्तम मास (मल मास) के पावन अवसर पर, सारण जिला के हद में उत्तर बिहार के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम सोनपुर में 17 से 23 मई तक विराट एवं भव्य संगीतमय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन होने जा रहा है।
ज्ञानयज्ञ की पूर्व संध्या पर 16 मई को देवस्थानम के पीठाधीश पूज्य स्वामी लक्ष्मणाचार्यजी महाराज ने इस अलौकिक अनुष्ठान के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। स्वामीजी ने बताया कि प्रत्येक तीन वर्ष में आने वाला पुरुषोत्तम मास आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का दुर्लभ अवसर है। इस मास में किए गए सभी धार्मिक व सत्कर्म अक्षय (जिसका कभी क्षय न हो) हो जाते हैं। यह समय सांसारिक और स्वार्थपरक कर्मों को त्यागकर, परमार्थ की ओर कदम बढ़ाने का है।
इस अवसर पर स्वामीजी ने कहा कि इस पावन महीने में श्रीमद्भागवत कथा, श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता का श्रवण, श्रीविष्णुसहस्रनाम पाठ, अष्टाक्षरी मंत्र जप, हवन और दान करने से जीव को अनंत गुणा पुण्य फल की प्राप्ति होती है। जगद्गुरु लक्ष्मणाचार्य के अनुसार 17 मई से 23 मई तक चलने वाले ज्ञान यज्ञ में प्रथम दिन 17 मई को प्रातः 7 बजे भव्य शोभा यात्रा एवं पोथी यात्रा, देवताओं का आह्वान, वैदिक पूजन, महाभिषेक, मंत्र जप एवं श्रीमद्भागवत मूल पारायण। अपराह्न 3 बजे से सायं 6 बजे तक पूज्य संतों के मुखारविंद से दिव्य संगीतमय कथा प्रवचन, महाआरती एवं महाप्रसाद वितरण होगा। रात्रि काल देश के विभिन्न अंचलों से पधारे प्रतिष्ठित संतों द्वारा आलौकिक भजन-संध्या एवं संकीर्तन।
बिनु सत्संग विवेक न होई मानव जीवन की सार्थकता को रेखांकित करते हुए स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने कहा कि मनुष्य योनि पाकर जीवन में कम से कम एक बार पूर्ण संकल्प के साथ भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। कथा के श्रवण मात्र से ही मानव को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सहज ही प्राप्ति हो जाती है। कहा कि बिना सत्संग के जीवन में विवेक जागृत होना असंभव है।
मुख्य यजमान एवं आयोजन समिति से जुड़े धर्मानुरागी
इस अलौकिक ज्ञान यज्ञ को सफल बनाने के लिए देवस्थानम में तैयारियां अंतिम चरण में हैं और देश के कोने-कोने से संतों व संन्यासियों का आगमन प्रारंभ हो गया है। इस अनुष्ठान में मुख्य यजमान के रूप में दिलीप झा, रत्न कुमार कर्ण, गौरी शंकर शुक्ला, सियामणि कुंवर, नृपेन्द्र नारायण शर्मा, कुमारी विजयालक्ष्मी, सुनीता सिंह, विनय कुमार चौबे, नारायणी और दिलीप सिंह सहित देवस्थानम के समस्त सेवादार एवं प्रबुद्ध सदस्य निष्काम भाव से समर्पित हैं। देवस्थानम प्रबंधन द्वारा कथा में सम्मिलित होने वाले देश-विदेश के सभी श्रोताओं, भक्तों एवं कल्पवासियों के लिए निःशुल्क भोजन (भंडारा) एवं ससम्मान आवास की उत्तम व्यवस्था की गई है।
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