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ध्वजारोहण व् अरणी मंथन के साथ ब्रह्मोत्सव सह श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ प्रारंभ

महायज्ञ में हजारों नर-नारियों ने की यज्ञ मंडप की परिक्रमा

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर के साधु गाछी स्थित श्रीगजेन्द्रमोक्ष देवस्थानम् दिव्य देश (नौलखा मन्दिर) में 28 जनवरी को 27वां श्रीब्रह्मोत्सव सह श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दूसरे दिन विधि विधान के साथ यज्ञ में गरुड़ ध्वजारोहण संपन्न किया गया। यज्ञ मंडप में वैदिक विद्वानों ने अरणी मंथन द्वारा अग्नि प्रकट किया। इसके साथ ही श्रीब्रह्मोत्सव सह श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ हो गया।

मौके पर हजारों श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की। इस दौरान भगवान श्रीगजेन्द्र मोक्ष की जय जयकार से सम्पूर्ण क्षेत्र गूंज उठा।

इस अवसर पर सर्वप्रथम प्रातःकालीन बेला में वैदिक अनुष्ठानोपरांत गरुड़-ध्वज का आह्वान कर गरुड़-स्तंभ पर आरोहण किया गया। तत्पश्चात भगवान श्रीबालाजी वेंकटेश्वर, श्रीदेवी, भूदेवी को गर्भ गृह से अभिषेक कर वस्त्र-आभूषण से अलंकृत कर रथ पर नाच-गान करते श्रद्धालुओं के साथ-साथ दिव्य विथि-भ्रमण कराया गया।

इस अवसर पर देवस्थान पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने बताया कि ब्रह्मोत्सव में भगवान पांच दिन तक सुबह और रात इसी तरह विथि-भ्रमण में रथारूढ़ होकर दर्शन देते हैं। दूसरी ओर यज्ञ-स्थल में वैदिक मन्त्रोंच्चार से आचार्यों द्वारा अर्णि-मंथन से निराकार ब्रह्म अग्नि देवता का साकार रूप में प्राकट्य कराया गया और यज्ञाहुति प्रारम्भ किया गया। हजारों भक्त महिलाओं ने यज्ञारंभ होते हीं यज्ञ-मंडप की श्रद्धापूर्वक परिक्रमा की। सायंकाल में ज्ञान-मंच पर दीप प्रज्वलित किया गया। साथ हीं प्रवचन और भजन-गायन का भी आयोजन किया गया।

इस अवसर पर देवस्थान पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने बताया कि पांच प्रकार की अग्नि है जिसमें सबसे पहला यज्ञाग्नि, जो सबसे शुद्ध अग्नि है। फिर जठराग्नि, बड़वाग्नि, योगाग्नि एवं दियासलाई की अग्नि। उन्होंने बताया कि संसार में मानव जीवन में अग्नि सबसे महत्वपूर्ण है। जन्म से मृत्यु पर्यन्त तक अग्नि ही समस्त कार्यों का संपादन करती है। कहा कि यज्ञ ही जीवन है। यज्ञ नहीं तो जन्म नहीं। मानव जीवन में जो 16 प्रकार के संस्कार हैं। यज्ञाग्नि की परिक्रमा करने से आधी व्याधि, जड़ा – मृत्यु , भय – पीड़ा एवं समस्त क्लेशों का नाश होता है।

इस अवसर पर लक्ष्मी नारायण मंदिर जनकपुर के महंतश्री 1008 दाशरथी स्वामी जी महाराज, अयोध्या से पधारे अयोध्या द्वारकाधीश मंदिर पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी सुर्यनारायणाचार्यजी महाराज, मुक्तिनाथ नेपाल से पधारे स्वामी सुदर्शनाचार्यजी महाराज, पटना के पालीगंज से आए मठाधीश स्वामी कमलनयाचार्यजी महाराज उपस्थित थे।

इस अवसर पर यज्ञ यजमान दिलीप झा, सुधांशु सिंह, शंभूनाथ पांडेय, भोला सिंह, रतन कुमार कर्ण, पंडित पवन शास्त्री, चंद्रकांत झा, शिवनारायण शास्त्री, पंडित वीरेंद्र शास्त्री, वाल्मीकि ओझा, संतोष झा, पंडित गोपाल शास्त्री, पंडित भाग्यनारायण झा, पंडित विजय झा, पंडित विदुर तिवारी सहित दर्जनाधिक पंडित उपस्थित थे। साथ हीं प्रवचन, भजन-गायन का भी आयोजन किया गया।

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