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एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक रही है शराब, मंत्री के आदेश की उड़ रही धज्जियां

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। झारखंड सरकार द्वारा देशी, विदेशी शराब की बिक्री के लिए नए नियमावली के तहत निजी हाथों द्वारा अब शराब बेची जा रही है। साथ ही साथ यह नियमावली भी निकाली गई है कि निर्धारित मूल्य यानि एमआरपी से अधिक कीमत में देशी या विदेशी शराब बेची जाने की शिकायत मिलती है तो उक्त दुकान मालिक पर विधिवत कार्रवाई की जाएगी। बावजूद इसके शराब दुकानदारों को विभागीय मंत्री के आदेश की कोई चिंता नहीं है। वे प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर धड़ल्ले से शराब बेच रहे है।

ज्ञात हो कि, झारखंड राज्य में बीते माह 22 अगस्त से ही निजीकरण की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी और एक सितंबर से शराब दुकानों का हैंड ओवर, टेक ओवर भी हो गया। यानी जिसने टेंडर ली, उसे दुकान संचालित करने के लिए पांच वर्षों तक के लिए दे दिया गया। नियमावली के अनुसार शराब दुकानदारों को सख्त आदेश दिया गया कि निर्धारित मूल्य में ही शराब बिक्री करेंगे और सरकार द्वारा जारी सभी गाइडलाइन का पालन करेंगे। बावजूद इसके झारखंड के बोकारो जिला में सरकारी नियमों तथा विभागीय मंत्री के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।

बानगी के तौर पर बोकारो के सेक्टर 12 मोड़ में संचालित शराब दुकानदार द्वारा खुलेआम निर्धारित मूल्य से ज्यादा कीमत पर शराब की बिक्री की जा रही है। बताया जाता है कि स्टर्लिंग रिजर्व बी 7 का निर्धारित मूल्य यानि बोतल में अंकित एमआरपी ₹200 है, लेकिन दुकानदार ₹210 में धड़ल्ले से ग्राहकों को बेच रहे है।

जब उक्त मामले की जानकारी बोकारो के सहायक उत्पाद आयुक्त को दी गई तो उन्होंने उक्त दुकान पर कार्रवाई करने की बात कही है। ध्यान देने योग्य है कि अब पूरी तरह एक माह भी राज्य में नये नियमावली के तहत शराब बिक्री का निजीकरण नहीं हुआ कि अभी यह हाल है। अगले पांच वर्षों में क्या होगा इसका सहज हीं अंदाजा लगाया जा सकता है।

यह हाल बोकारो जिला के हद में संचालित दर्जनों शराब दुकानों में देखा जा सकता है। अगर ऐसे शराब दुकानो पर उत्पाद विभाग कार्रवाई नहीं करती है तो शराब दुकानदारों का मनमानी चरम सीमा पर पहुंच जायेगा। निजीकरण के बाद यह मामला बोकारो जिला में सामने आया है। इसे एक स्थानीय ग्राहक ने 210 रुपया ऑनलाइन भुगतान किया है जिसका स्किन शॉट मीडिया कर्मी को भेजा गया है। उक्त आशय की जानकारी पत्रकार द्वारा बोकारो के उत्पाद विभाग सहित सूबे के उत्पाद एवं मद्द निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद को व्हाट्सएप के माध्यम से दे दी गई है। अब देखना है कि आगे की कार्रवाई क्या होती है?

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