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पेंशन के लिए 92 वर्षीय महिला लगा रही है बैंक का चक्कर

विजय कुमार साव/गोमिया (बोकारो)। व्यवस्था के नक्कारे के कारण आज पेंशन के लिए 92 वर्षीय विधवा महिला बैंक का लगातार चक्कर लगा रही है। उक्त जानकारी झारखंड आंदोलनकारी नेता इफ्तेखार महमूद ने 23 मार्च को दी।

बताया जाता है कि बोकारो जिला के गोमिया के हद में ललपनिया अय्यर रहिवासी सरकारी शिक्षक बाबू दास मांझी की वर्ष 1977 में मृत्यु के बाद उनकी विधवा 92 वर्षीय सूरज मुनि देवी को पिछले 38 साल से पेंशन नवंबर 2015 तक दिया गया है। जिसका पीपीओ नंबर S/44114 है। वर्ष 2016 में उक्त महिला का दुर्घटना में पैर टूट गया। संभवतः जीवित प्रमाण पत्र के अभाव में उसका पेंशन रुक गया, किंतु बाद की अवधि में उक्त महिला एवं उनके पुत्र शिवचरण मांझी ने 33 किलोमीटर दूर से आकर एसबीआई के गोमिया शाखा का कई चक्कर लगाये। संबंधित बैंक कर्मियों के गैर जवाबदेह पूर्ण व्यवहार के कारण उक्त महिला निराश होकर बैंक का चक्कर काटना बंद कर दी। फलस्वारुप पिछले 9 वर्ष से उसका पेंशन भुगतान रुका है।

बीते अक्टूबर 2025 में उपर्युक्त मामला आंदोलनकारी नेता इफ्तेखार महमूद के पास आया। महमूद के पहल पर एसबीआई गोमिया के ब्रांच मैनेजर ने 8 अक्टूबर 25 को भारतीय स्टेट बैंक के केंद्रीकृत पेंशन प्रक्रिया केंद्र पटना को सूचित किया। पेंशन प्रक्रिया केंद्र पटना ने पेंशन चालू करने के बजाय कोषागार आदेश की मूल प्रति की मांग पेंशनधारी लाभुक से किया है।

केंद्रीकृत पेंशन प्रक्रिया केंद्र पटना के सहायक महाप्रबंधक द्वारा कोषागार आदेश की प्रति पेंशनधारी वृद्धा से मांगे जाने के संबंध में महमूद ने कहा कि झारखंड कोषागार संहिता तथा कोषागार नियमावली 2011 के नियम 208 (क) के आलोक में कोषागार आदेश की प्रति व्यय पदाधिकारी को ही उपलब्ध कराना है। महमूद ने कहा कि 92 वर्षीय अनपढ़ और शारीरिक रूप से लाचार महिला से कोषागार आदेश की मूल प्रति की मांग कर व्यय पदाधिकारी ने न सिर्फ नियम का उल्लंघन किया है, बल्कि संवेदनहीनता का भी परिचय दिया है।

महमूद ने कहा है कि कोषागार आदेश की प्रति व्यय पदाधिकारी द्वारा एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो लाचार सूरजमानी देवी भारतीय स्टेट बैंक गोमिया ब्रांच के मुख्य द्वार के समक्ष धरना पर बैठ जाएगी।

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