आवासीय विद्यालय में नामांकन और ₹4,000 मासिक मदद के निर्देश
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। संवेदनशीलता और कर्तव्यपरायणता की मिसाल पेश करते हुए बोकारो के उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा 27 अक्टूबर को एक बार फिर चंदनकियारी के उन तीन अनाथ बच्चों का हाल-चाल जानने उनके घर पहुंचे, जिन्होंने बीते दिनों अपने माता-पिता को खो दिया था।
जानकारी के अनुसार 5 महीने के अंतराल के बाद दोबारा बच्चों के बीच पहुंचे उपायुक्त ने न सिर्फ उनका कुशलक्षेम पूछा, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य और आर्थिक सुरक्षा के लिए अधिकारियों को सख्त व महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
उपायुक्त झा ने इस अवसर पर कहा कि माता-पिता की छत्रछाया खो चुके इन मासूम बच्चों को प्रशासनिक व्यवस्था में कभी अकेलापन या बेसहारा महसूस नहीं होने दिया जाएगा।
प्रशासन न केवल इनकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित रहने-खाने की व्यवस्था करेगा, बल्कि इनके भविष्य की हर जरूरत और आर्थिक सुरक्षा का पूरा ख्याल रखेगा। इन बच्चों का सही मार्गदर्शन, बेहतर परवरिश और एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना ही बोकारो जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने बच्चों से आत्मीयता से बातचीत की और उनकी पढ़ाई का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि बच्चों की शिक्षा में कोई बाधा न आए, इसके लिए उनका नामांकन जल्द से जल्द नजदीकी उत्कृष्ट आवासीय विद्यालय में कराया जाए, ताकि उन्हें बेहतर माहौल और सुविधाएं मिल सके।
बच्चों के दैनिक खर्चों और आर्थिक सहायता के लिए उपायुक्त ने महिला एवं बाल विकास विभाग की स्पॉन्सरशिप योजना (स्पोंसरशिप स्कीम) के तहत दो बच्चों को प्रतिमाह ₹4,000 (₹2,000 प्रत्येक बच्चा) की वित्तीय मदद देने का आदेश दिया। यह राशि सीधे बच्चों के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी। डीसी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बच्चों के बालिग होने तक उनके नाम पर दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा (लॉन्ग-टर्म फाइनेंसियल सिक्योरिटी) के प्रबंध किए जाएं, ताकि भविष्य में उन्हें किसी भी आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। उपायुक्त की इस त्वरित और मानवीय पहल की स्थानीय ग्रामीणों एवं प्रबुद्ध जनों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
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