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एसबीआई के सहयोग से लोक पंच द्वारा गांधी मैदान में लालच का जाल नाटक का मंचन

एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। लोक पंच द्वारा एसबीआई के सहयोग से 26 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान स्थित एसबीआई प्रांगण में नाटक लालच का जाल का मंचन किया गया। इसके लेखन एवं निर्देशन प्रसिद्ध टीवी कलाकार सह रंगकर्मी मनीष महिवाल ने किया।

जानकारी के अनुसार प्रस्तुत नाटक लालच का जाल एक समकालीन सामाजिक नाटक है, जो डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों और उनके जाल में फँसते आम जनों की कहानी प्रस्तुत करता है।

नाटक की कहानी अलग-अलग घटनाओं के माध्यम से साइबर अपराध की भयावह दुनिया को उजागर करती है। पहली कहानी अमित की है, जो पटना का एक कॉलेज छात्र है और अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पार्ट-टाइम नौकरी की तलाश कर रहा है। घर बैठे आसानी से हजारों रुपये कमाने के लालच में वह अनजाने में साइबर अपराधियों के जाल में फँस जाता है। अपने बैंक खाते के माध्यम से ठगी की रकम दूसरे खातों में पहुँचाने के बदले कमीशन पाने वाला अमित का अकाउंट मनी म्यूल अकाउंट बन जाता है।

जब साइबर सेल उसके खाते को फ्रीज़ कर देती है और उसे पता चलता है कि उसका बैंक खाता साइबर ठगी के पैसों के लेन-देन में इस्तेमाल हुआ है, तब उसे अपनी गलती और उसके गंभीर कानूनी परिणामों का एहसास होता है। नाटक में दूसरी कहानी राहुल की है, जो एक फर्जी वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल ब्लैकमेलिंग का शिकार बन जाता है।

सामाजिक बदनामी के डर से वह अपराधियों को पैसे दे देता है, लेकिन उनकी माँग लगातार बढ़ती जाती है। मानसिक तनाव और निराशा के बीच राहुल आत्मघाती विचारों तक पहुँच जाता है। अंततः वह हिम्मत जुटाकर अपने दोस्त की मदद लेता है और साइबर सेल तक पहुँचता है, जहाँ उसे सहायता और न्याय की उम्मीद मिलती है।

ऐसे कुछ घटनाओं के माध्यम से नाटक यह दिखाता है कि डिजिटल दुनिया में थोड़ी-सी लापरवाही, लालच या भय किस तरह किसी के जीवन को संकट में डाल सकता है। साथ ही, यह नाटक संदेश देता है कि साइबर अपराधियों के सामने झुकना या चुप रहना समाधान नहीं है। जागरूकता, साहस और समय पर सही सहायता लेना ही इस जाल से बाहर निकलने का रास्ता है।

प्रस्तुत नाटक का उद्देश्य दर्शकों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों, डिजिटल ब्लैकमेलिंग, बैंक खातों के दुरुपयोग और ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। यह नाटक विशेष रूप से युवाओं को सावधान रहने, अनजान पर भरोसा न करने और साइबर अपराध का शिकार होने पर बिना भय के पुलिस एवं साइबर सेल से संपर्क करने का संदेश देता है। प्रस्तुत नाटक में कलाकार मृत्युंजय प्रसाद, रजनीश पांडेय, अभिषेक राज, रोहित कुमार, सोनल कुमारी, प्रिंस, गौतम एवं मनीष महिवाल ने अपनी किरदार को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक के लेखक व् निर्देशक रंगकर्मी मनीष महिवाल है।

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