अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर के गज – ग्राह चौक स्थित संगत ग्रैंड सभागार में बीते 25 अक्टूबर को आयोजित हरिहर क्षेत्र साहित्य उत्सव 2026 के अवसर पर समाज, शिक्षा, विज्ञान और कला के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान देने वाली छह विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने प्रबुद्ध हस्तियों को हरिहर क्षेत्र गौरव सम्मान एवं हरिहर क्षेत्र नारायणी रत्न सम्मान से अलंकृत किया। सम्मानित होने वाली हस्तियों में महिला रचनाकार भी सम्मिलित हैं।
यह भव्य आयोजन श्रम साध्य वर्ग के वंचित बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा की अलख जगाने, दंत चिकित्सा के क्षेत्र में नवीन उपकरणों के आविष्कार, संगीत साधना, जंतु विज्ञान और साहित्य सृजन जैसी विविध विधाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का माध्यम बना।
हरिहरक्षेत्र चेतना मंच के अध्यक्ष महेन्द्र प्रताप, महासचिव तृप्तिनाथ सिंह एवं साहित्यकार सुरेन्द्र मानपुरी ने उपरोक्त जानकारी देते हुए 26 अक्टूबर को बताया कि सम्मानित विशिष्ट हस्तियों में हरिहर क्षेत्र जन जागरण मंच के शैक्षिक प्रकल्प के अंतर्गत मुक्ताकाश में संचालित संस्कारशाला नारायणी विद्या दान के प्राचार्य आलोक कुमार भी हैं।

उन्हें समाज के श्रमसाध्य वर्ग के आश्रित वंचित बच्चों को व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करने तथा राष्ट्रीय चेतना संपन्न सजग नागरिक के रूप में संस्कारित करने वाली इस अनूठी मुहिम के नेतृत्व हेतु हरिहर क्षेत्र गौरव सम्मान प्रदान किया गया। इसी क्रम में हाजीपुर (वैशाली) के दंत चिकित्सक डॉ शशि कुमार को दंत चिकित्सा के क्षेत्र में नए उपकरणों के आविष्कार के लिए सम्मानित किया गया। अब तक उनके नौ अविष्कार पेटेंट हो चुके हैं। संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट साधना और योगदान के लिए रोशन राज भोजपुरिया को सम्मानित किया गया।
जंतु विज्ञान के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य के लिए प्रो. सत्येन्द्र कुमार को हरिहर क्षेत्र गौरव सम्मान से नवाजा गया। मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध लेखिका डॉ अनीता सिंह को उनकी चर्चित कृतियों विशेषकर गंडक की बेटी के लिए हरिहर क्षेत्र नारायणी रत्न सम्मान प्रदान किया गया। गाजियाबाद की विशिष्ट योगदान के लिए डॉ स्मिता गुप्ता को हरिहर क्षेत्र नारायणी रत्न सम्मान से अलंकृत किया गया। इसके अतिरिक्त, साहित्यिक अनुष्ठान में काव्य-सृजन को प्रोत्साहित करते हुए 36 कवियों को अंगवस्त्र एवं झोला भेंट कर सम्मानित किया गया, जिसने उत्सव के सांस्कृतिक वैभव को और अधिक समृद्ध किया।
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