रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दुर स्थित चीरा चास थाना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। वीडियो में सामने आई पुलिस की कार्यशैली ने न सिर्फ विभाग की छवि पर सवाल खड़े किए है, बल्कि संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नाथू सिंह मीणा ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट आने के बाद थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार बीते 5 मई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें चीरा चास थाना से जुड़े पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। वीडियो के वायरल होते ही यह मामला चर्चा का विषय बन गया। पुलिस अधीक्षक ने बिना देर किए चास के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) को पूरे मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
एसडीपीओ द्वारा की गई जांच में सामने आया कि बीते 4 मई की शाम लगभग 7:30 बजे चीरा चास थाना क्षेत्र के वीणा रीजेंसी के सामने आरोपी हर्ष पांडेय और उनके सहयोगियों ने आरिफ अंसारी के साथ मारपीट की थी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, जहां आरिफ अंसारी घायल अवस्था में मिले। हालांकि, यहां पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई। प्राथमिक उपचार और अस्पताल पहुंचाने के बजाय घायल को थाना लाकर हाजत में डाल दिया गया, जो पुलिस की संवेदनशीलता और कर्तव्य के विपरीत है।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि किसी भी घायल को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना पुलिस की पहली जिम्मेदारी होती है। लेकिन इस मामले में पुलिसकर्मियों ने इस बुनियादी कर्तव्य की अनदेखी की। इस तरह की लापरवाही को गंभीर माना गया है और इसे विभाग की छवि को धूमिल करने वाला बताया गया। साथ हीं अनुशासनहीनता का मामला भी आया सामने।
वायरल वीडियो में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है, जिसमें सहायक अवर निरीक्षक संजय कुमार मंडल थाना परिसर में अनुचित परिधान में दिखाई दिए। यह न केवल व्यक्तिगत अनुशासनहीनता को दर्शाता है, बल्कि थाना प्रभारी की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। मामले में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप सही पाए जाने के बाद चीरा चास थाना प्रभारी पुष्पराज कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक राजेश कुमार और सहायक अवर निरीक्षक संजय कुमार मंडल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन-यापन भत्ता दिया जाएगा।
एसपी की इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप का माहौल है। वायरल वीडियो ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि व्यापक रूप से पुलिस की कार्यशैली, जवाबदेही और मानवीय दृष्टिकोण पर बहस छेड़ दी है। पुलिस प्रशासन अब इस मामले को एक उदाहरण के रूप में देखते हुए आगे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। साथ ही अधिकारियों को यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि कर्तव्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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