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कभी कभी समाज और कानून पीड़िता को न्याय दिलाने में असमर्थ

गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। वैशाली न्यायालय अधिवक्ता, सदस्य पारिवारिक विवाद समाधान मंच वैशाली (Vaishali) में एक ऐसा पेचिदा मामला आया है जिसका समाधान जरुरी है। उसे अपने शब्दो में बयां कर रहा हूँ। संभव है प्रबुद्धजन समाधान को अग्रसर होंगे।
कल रात एक पीड़िता के भाई का फोन आया कि उसकी बहन की शादी 11 वर्ष पूर्व एक अवकाश प्राप्त कर्मी के दूसरे छोटे पुत्र के साथ हुई। पीड़िता को एक 8 वर्ष का पुत्र है। पुत्र प्राप्ति के 1 वर्ष बाद ही पीड़िता के पति ने अपने पिता की प्रताड़ना की वजह से आत्महत्या कर लिया और पीड़िता विधवा हो गई।
पीड़िता के ससुर घर की औरतों के साथ गाली ओर डंडे से बात करते है। जेठ का भी वही हाल है। पीड़िता के ससुर ने गांव के एक छोड़ पर अपना मकान (House) बना रखा है और पीड़िता के परिवार वालो का गांव घर में आना जाना नही है। पीड़िता के ससुर गांव में किसी के कोई अवसर पर भी नही जाते हैं। गांव समाज के लोग भी इनके यहां नही आते है। पति की मौत के बाद जब पीड़िता को ससुराल वाले परेशान करने लगे तब पीड़िता के भाई ने गांव समाज के लोगो की पंचायत बुलाई। पंचायती में पीड़िता को ठीक से रखने का उसके ससुर ने वायदा किया, लेकिन उसके ससुर का गाली ओर डंडा चलता रहा। पीड़िता सामाजिक प्रतिष्ठा की वजह से गाली ओर मार सहती रही।
गत वर्ष पीड़िता के जेठ ओर गोतनी ऑनर किलिंग में जेल चले गए। उसके बाद पीड़िता का जीना मुश्किल हो गया। तब पीड़िता अपने बच्चे को छोड़कर मायके चली आयी। बच्चा अपने दादा के पास है। पीड़िता के ससुर के पास जमीन जायदाद भी कम है। ससुर कसाई से कम नही इसलिए, पीड़िता की भी जान का खतरा हैं। उपरोक्त जानकारी देते हुए पीड़ित के भाई ने मुझसे कानूनी सलाह मांगा। दुर्भाग्यवश मैं पीड़िता के मायके ओर ससुराल पक्ष दोनों परिवार को व्यक्तिगत रूप से जनता हूँ। पीड़िता के ससुराल वाले समाज से कटे हैं और समाज की कोई बात नही मानेंगे। ऐसी स्थिति में मैने पीड़िता के भाई को पीड़िता को हलाल होने के लिये कसाई के पास न भेजने की सलाह दिया है। दूसरी बात पीड़िता के स्वसुर के पास जमीन जायदाद बहुत कम है और पीड़िता का लड़का भी दादा के पास है। जिस वजह से न्यायालय भेजने से भी कोई फायदा नही होगा । कानून बहुत महंगा है। एक लाचार विधवा नही पुरा कर सकती। कानूनी प्रक्रिया लंबी चलेगी। कानून का पीड़िता के ससुराल वालों को कोई भय भी नही है, जिस वजह से मैने पीड़िता के भाई को पीड़िता की उम्र 35 वर्ष देखते हुये उसकी दूसरी शादी का सलाह दिया। क्या मैंने गलत सलाह दिया?

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