मर्जी के आओ, बैठो, बोलो कार्यक्रम में जुटीं महिलाएं !
प्रहरी संवाददाता/मुंबई। मौजूदा समय में विभिन्न कारणों से पीड़ित महिलाओं के लिए आओ, बैठो, बोलो कार्यक्रम (Program) का आयोजन मेरे अधिकार, मेरी जिम्मेदारी (मर्जी) नमक सामाजिक संस्था (Social Institution) द्वारा किया गया।
कुर्ला पूर्व कामगार नगर में आयोजित करीब तीन घंटे के इस कार्यक्रम में कुर्ला, भांडुप, अंधेरी, ग्रँटरोड, मानखुर्द, कांदिवली, विभाग की महिलाओं ने हिस्सा लिया व आप बीती साझा किया।
इन सभी महिलाओं का मार्गदर्शन संगठन की रिंकू लोखंडे ने किया। वही वैष्णवी कदम, सपना शेट्टी, गौरी कदम आदी ने मर्जी के कार्यों कि विस्तृत जानकारी दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में आईं महिलाओं ने इस कार्यक्रम में आप बीती एक दूसरे के साथ साझा किया। इतना ही नहीं एक दूसरे के दुःख दर्द को अपने अश्कों (आंसुओं) से बांटा, ताकि कुछ दर्द हल्का हो। इनमें एक महिला ने अपने जालिम पति के जुल्मों सितम की दास्तां कुछ इस अंदाज में बयां किया कि सभी रोने लगीं, उनके अश्क घंटों बहते रहे।
आओ, बैठो, बोलो कार्यक्रम (Come Sit Speak Program) में आईं महिलाओं की दास्तां एक दूसरे से भले ही अलग हैं, लेकिन जीवन से जुड़ा है। सीधी सादी व भोली -भाली इन महिलाओं की जुबानी जो कहानी सामने आई है, वह वाकई भयंकर है ,जोकि समाज के मुंह पर तमाचा है।
अपने ऊपर हुए अत्त्याचार को बयान करने वाली अधिकांश महिलाएं सिसकते हुए अपने अश्कों को रोकने की कोशिश करती रहीं लेकिन रोक नहीं पाईं। इनमें एक दूसरे की दास्तां सुनकर सभी के आंसू खुद ब खुद निकल आये।
इस कार्यक्रम में कुछ पल दु:ख का माहौल रहा। इन महिलाओं को ऐसी परिस्तिथियों से बाहर निकालने के लिए संगठन की साथी रिंकू लोखंडे ने अंताक्षरी शुरु किया। उनके आव्हान के बाद गाना और चुटकुले का भी दौर चला। इसमें महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। इससे गम का माहौल खुशीयों में बदला, जैसे की यहां आईं महिलाएं एक दूसरे को वर्षों से जानती हों।
इसके बाद दुखों का बदल छटां और मर्जी के कार्यालय में हंसी मजाक का दौर काफी देर तक चलता रहा। इस कार्यक्रम के अंतिम में सभी को अल्पोपहार दिया गया। समाज में उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को एकत्रित करके मर्जी संगठन के माध्यम से उन्हे न्याय दिलाने के लिए सभी ने शपथ ली।
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