एक जोड़ी जूते की ₹4000 से ₹80000 है कीमत
गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। नए मंत्रिमंडल के गठन के बाद बिहार सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री काफी एक्टिव दिख रहे हैं। इसे लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 24 नवंबर को वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर के औद्योगिक क्षेत्र का दौरा किया।
मुख्यमंत्री नीतीश ने औद्योगिक क्षेत्र हाजीपुर स्थित न्यू जील फैशनवियर इकाई, जूता निर्माण इकाई और ब्रिटानिया बिस्किट फैक्ट्री का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने उत्पादन प्रक्रिया, संसाधनों, बाजार मांग और कार्यशैली की विस्तृत जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने वहां प्रबंधन से उपलब्ध सुविधाओं पर भी चर्चा की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों को आश्वस्त किया कि उद्योगों की किसी भी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार पुरी तरह प्रतिबद्ध है। उनके साथ राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और वैशाली विधायक सिद्धार्थ पटेल मौजुद रहे। सीएम नीतीश कुमार ने हाजीपुर के औद्योगिक क्षेत्र पहुंचकर सबसे पहले जैकेट फैक्ट्री का अवलोकन किया।
इसके बाद वे सैनिकों के लिए जूता बनाने वाली फैक्ट्री पहुंचे। उन्होंने फैक्ट्री में काम कर रहे कामगारों से भी बात की। सबसे खास बात यह है कि कंपिटेन्स एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड रसियन सैनिकों के लिए जूता एक्सपोर्ट करती है। इसके बाद मुख्यमंत्री ब्रिटानिया बिस्किट फैक्ट्री पहुंचे। वहां उन्होंने मजदूरों से बात की तो पता चला यहां काम करने वाले अधिकतर श्रमिक स्थानीय हैं तथा कामगारों में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। इससे सीएम नीतीश काफी खुश नजर आए।

औद्योगिक क्षेत्र स्थित तीनों इकाइयों के निरीक्षण के दौरान बताया गया कि यहां काफी संख्या में स्थानीय रहिवासियों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। खासकर महिलाओं को। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, कांपिटेंस एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड में करीब चार सौ श्रमिक हैं, जिनमें महिला श्रमिकों की संख्या 60 फीसदी से अधिक है।
यहां बने जूते यूरोपीय देशों में सप्लाई किए जाते हैं। यहां बनने वाले विशेष जूतों की रूसी सेना में भी काफी मांग है। इसी तरह न्यू जील फैशन वियर में करीब सात सौ श्रमिक कार्यरत हैं। यहां महिला श्रमिकों की संख्या 600 से 650 है, यानी करीब 85 फीसदी। ये सभी स्थानीय हैं। बताया गया कि वर्ष 2018 में हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में कांपिटेंस एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नामक यह कंपनी खोली गई थी।
अपनी विशिष्ट डिजाइन, उच्च मजबूती और आरामदायक गुणवत्ता के कारण इन जूतों ने यूरोपीय देशों के बाजारों में तेजी से अपनी धाक जमाई। प्रबंधन के अनुसार, कंपनी का सालाना टर्नओवर अब 100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इन जूतों की कीमत चार हजार रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक है।
यह जूता माइनस 40 डिग्री तक तापमान सहने की क्षमता, रूसी सैनिकों को खास पसंद है। बताया गया कि यहां रूसी सैनिकों के लिए खास तरह के जूते बनाए जाते हैं। हर वर्ष लाखों की संख्या में इसकी सप्लाई भी की जा रही है। इन जूतों की खासियत यह है कि ये काफी हल्के होते हैं, लेकिन इनके तलवे का विशेष डिजाइन फिसलन से बचाता है।
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