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बाल विवाह मुक्त देश निर्माण में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका अहम-सावित्री

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। संविधान क्लब ऑफ इंडिया नई दिल्ली में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन द्वारा आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श का 27 जुलाई को शुभारंभ केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने दीप प्रज्वलित कर की।

कार्यक्रम में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के संस्थापक भुवन ऋभु ने विषय प्रवेश करते हुए पिछले तीन वर्षों के दौरान बाल अधिकार संरक्षण, बाल विवाह उन्मूलन, बाल तस्करी की रोकथाम तथा बच्चों के पुनर्वास के क्षेत्र में संगठन द्वारा किए गए कार्यों एवं उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार, न्यायपालिका, प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

इस अवसर पर सांसद लाबू कृष्णा ने कहा कि यदि देश का प्रत्येक सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में बाल सुरक्षा एवं बाल अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर कार्य करे, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत एक बाल मित्र देश के रूप में स्थापित होगा। मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि सामाजिक संस्थाएँ बच्चों को शोषण, बाल विवाह और बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं से बचाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के वर्ष 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से इस लक्ष्य को अवश्य प्राप्त किया जाएगा।

चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श में देश के 782 जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिसमें झारखंड से ग्रामीण विकास ट्रस्ट के संस्थापक शंकर रवानी, सहयोगिनी बोकारो से गौतम सागर, लोहरदगा सेवा संस्थान से विक्रम कुमार, आश्रय से दीपा, बनवासी कल्याण आश्रम से सुरेश शक्ति, जन सेवा परिषद से रामलाल, विप्लव कुमार, कालेश्वर मंडल, रानी, आभा, राजेन सिन्हा तथा चाइल्ड राइट फाउंडेशन से बैजनाथ कुमार सहित कई प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय परामर्श में सहभागिता की। बताया जाता है कि राष्ट्रीय परामर्श के दौरान बाल अधिकार संरक्षण, बाल विवाह उन्मूलन, बाल तस्करी की रोकथाम, बच्चों के पुनर्वास तथा बाल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत चर्चा की जाएगी।

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