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सरहुल प्रकृति का त्यौहार-योगेंद्र प्रसाद

ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। बोकारो जिला (Bokaro district) के हद में तेनुघाट पंचायत भवन स्थित अनुमंडल स्तरिय सरहुल पूजा समिति के द्वारा 8 अप्रैल को सरहुल पूजा का आयोजन किया गया।

जिसमे मुख्य अतिथि गोमिया के पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद (MLA Yogendra Prasad), समिति के अध्यक्ष नागेश्वर करमाली, चांपी मुखिया श्रीराम हेम्ब्रम, राधानाथ सोरेन के द्वारा फीता काटकर एवं मांदर बजा कर सरहुल अखड़ा का उद्घघाटन किया गया। मंच संचालन उलगड्डा पंचायत के पूर्व मुखिया अरविंद मुर्मू ने किया।

इस अवसर पर पूर्व विधायक प्रसाद ने बताया कि सरहुल प्रकृति का पर्व है। सरहुल वसंत ऋतु में मूल रूप से आदिवासी समुदाय के द्वारा मनाए जाने वाला आदिवासियों का प्रमुख त्योहारों में से एक है। उन्होंने बताया कि वसंत ऋतु में जब पेड़ से पुराने पत्ते झड़ कर नये पत्तों का सृजन होने लगता है, तब सरहुल का पर्व मनाया जाता है।

पूर्व विधायक ने बताया कि यह पर्व मुख्यतः चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के तृतीय से शुरू होता है और चैत्र पूर्णिमा को समाप्त होता है। कोई समाज कितना समृद्ध है यह उसके उत्सव मनाने के तरीके से आसानी से समझ में आता है।

यह पर्व हर वर्ष हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र माह के तीसरे दिन मनाया जाता है। आदिवासी इलाकों में नव वर्ष के आगमन के रूप में यह उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान सखुआ वृक्ष फूल और छाल की पूजा किया जाता है।

उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के कारण दो वर्षों से इस पर्व से वंचित रहा और लोगों के द्वारा यह पर्व नहीं मनाया जा सका था। इस मौके पर पेटरवार के प्रखंड विकास पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार चौरसिया, झामुमो जिला सचिव अशोक मुर्मू, मनोहर मुर्मू, पूर्व जीप सदस्य दिलीप मुर्मू, आदि।

तेनुघाट पंचायत मुखिया रेखा सिन्हा, सुखलाल मुर्मू, मुखिया चरगी रानी कुमारी मुर्मू, लालजी टुड्डू, सीताराम मुर्मू, राजन नायक, गोपाल जी विश्वनाथन, आलोक रंजन, पंकज नायक सहित कई गणमान्य रहिवासी मैजूद थे।

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