कृपा की न होती जो आदत तुम्हारी, तो सुनी ही रहती अदालत तुम्हारी
प्रहरी संवाददाता/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के गोला बाजार पश्चिमी क्षेत्र स्थित तृप्तिनाथ सभा कक्ष में 11 अक्टूबर की संध्या रागभरी संगीत संध्या कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संगीत विद्या के जानें माने कलाकार व राम सुंदर दास महिला महाविद्यालय गोला बाजार सोनपुर के सचिव तृप्तिनाथ सिंह ने हारमोनियम पर एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति कर राग भरी संगीत संध्या को जीवंत बना दिया।
इस मौके पर उनका साथ दे रहे थे संगीतानुरागी एवं क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकार सुरेन्द्र मानपुरी। इस अवसर पर तृप्तिनाथ सिंह ने अपने गाए भजन, गजल, राग मारू बिहार, राग भोपाली, राग देस एवं भोजपुरी लोक गीतों की प्रस्तुति से संध्या कालीन बेला को खुशनुमा बना दिया। इसकी बानगी की झलक भजन की निम्न पंक्तियों से मिलती है।
तृप्तिनाथ की भजनो में कृपा की न होती जो आदत तुम्हारी, तो सुनी ही रहती अदालत तुम्हारी। जो दिनों के दिल में, जगह तुम न पाते तो किस दिल में होती हिफाजत तुम्हारी। इसी तरह मैंने लाखों के बोल सहे सांवरिया तेरे लिए भजन भी मर्म को छू गया। सुप्रसिद्ध भजन बोल कागा बोल मेरे राम कब आएंगे ने भी इस सुहानी संध्या में मर्म को छुए बिना नहीं रहा। इसी तरह गजल गायिकी का दौर भी चला, जहां दो दिलों की मुलाकात होगी, जुबां चुप रहेगी मगर बात होगी तथा दादरा तोरे नैनन की लागी कटार सजनी, चैन पावे न मनवा हमार सजनी की प्रस्तुति भी लाजवाब थी।
महेन्द्र मिसिर की पूर्वी कि राजाजी की बिटिया भईल नाम रजरनिया के अलावा दुनिया के समंदर में तूफान भी आते हैं जो प्रभु को भजतें हैं उन्हें प्रभु बचाने आते हैं भजन अन्तर्मन को छू लिया। भोजपुरी लोक गीत अईल विदेश से सईयां तथा ले ले अइहा बालम बजरिया से चुनर की प्रस्तुति भी शानदार रही।
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